Bihar News: बिहार के भोजपुर जिले में भरत तिवारी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच के लिए पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा के नेतृत्व में एक टीम का गठन कर दिया है. घटना के बाद से ही भरत तिवारी का परिवार न्याय की मांग पर अड़ा हुआ है. भरत की मां की शिकायत पर शाहपुर थाने में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.
पीड़ित परिवार का संकल्प स्पष्ट है कि उन्हें आर्थिक मुआवजा या सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि केवल अपने बेटे के दोषियों के लिए कड़ी सजा चाहिए. परिवार का कहना है कि वे किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेंगे.
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पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
इससे पहले मामला तब और पेचीदा हो गया जब पुलिस ने मृतक के पिता और भाई समेत 50 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया. इस दोहरी कार्रवाई ने इलाके में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है. इसी के विरोध में बुधवार को बिलोटी गांव में एक महापंचायत बुलाई गई. इसमें हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने प्रशासन को एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है. भरत के भाई चंदन तिवारी ने साफ कहा है कि यदि एक सप्ताह के भीतर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती है तो वे इस लड़ाई को दिल्ली तक ले जाएंगे और बिहार में एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा करेंगे.
जांच पर टिकी सबकी नजरें
जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा के नेतृत्व में होने वाली यह जांच अब इस मामले का भविष्य तय करेगी. स्थानीय लोगों और परिजनों का मानना है कि अब उन्हें निष्पक्ष जांच की उम्मीद है. देखना यह होगा कि क्या प्रशासनिक सख्ती के बीच यह जांच टीम समय सीमा के भीतर सच को सामने ला पाती है या फिर भरत तिवारी का परिवार सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा.
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