बिहार की राजधानी पटना सहित राज्य के विभिन्न नगर निकायों में सफाई व्यवस्था पर संकट गहरा गया है. बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ और संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर पटना नगर निगम के स्थायी, दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्सिंग सफाई कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. हड़ताल के कारण कई इलाकों में कचरे के उठाव और सफाई कार्य पर असर देखा जा रहा है.
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी लंबित मांगों पर लंबे समय से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया. कई बार ध्यान आकर्षित करने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होने पर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा.
क्या हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
हड़ताल पर गए कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में संविदा और दैनिक मजदूरी पर वर्षों से काम कर रहे कर्मियों का नियमितीकरण शामिल है. इसके अलावा आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर कर्मचारियों का सीधे नगर निकायों में समायोजन करने की मांग भी उठाई जा रही है.
कर्मचारी समान काम के बदले समान वेतन की मांग कर रहे हैं. साथ ही एसीपी और एमएसीपी जैसी लंबित प्रक्रियाओं को फिर से लागू कर वेतन संबंधी विसंगतियां दूर करने की मांग भी कर रहे हैं.
नगर निगम ने शुरू की आपातकालीन व्यवस्था
हड़ताल के बीच पटना नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष आपातकालीन व्यवस्था लागू कर दी है. नगर आयुक्त यशपाल मीणा और निगम मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में सभी छह अंचलों में पूरी रात सघन सफाई अभियान चलाया गया. अभियान के दौरान मुख्य सड़कें, बाजार, स्कूल, अस्पताल और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई. दिन के समय यातायात बाधित न हो इसलिए सफाई कार्य रात्रि में कराया गया.
मशीनों और अतिरिक्त मानवबल का लिया जा रहा सहारा
कचरे के त्वरित उठाव के लिए जेसीबी, हाइवा और बॉबकैट जैसी आधुनिक मशीनों का उपयोग किया गया. सफाई के बाद चूना और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव भी कराया गया ताकि स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न न हों.
निगम ने सफाई निरीक्षकों को प्रत्येक वार्ड में अतिरिक्त 15 से 20 सहयोगियों की टीम तैयार करने का निर्देश दिया है. इन टीमों को सफाई कर्मियों के साथ मिलकर काम करने को कहा गया है ताकि किसी भी स्थिति में सफाई कार्य बाधित न हो.
हड़ताल के बीच सख्त चेतावनी
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी आउटसोर्सिंग एजेंसियों को अनुबंध के अनुसार पर्याप्त संख्या में कर्मी उपलब्ध कराने होंगे. ऐसा नहीं करने वाली एजेंसियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. ड्यूटी पर आने के बाद भी काम नहीं करने वालों पर भी कार्रवाई हो सकती है.
सभी सफाई कर्मियों की बायोमेट्रिक और मैनुअल उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य किया गया है. बिना अनुमति अनुपस्थित पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे.
काम में बाधा डालने वालों पर होगी एफआईआर
निगम प्रशासन ने चेतावनी दी है कि सफाई कार्य में बाधा पहुंचाने, कर्मचारियों को डराने या सरकारी कार्य में व्यवधान पैदा करने वाले लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. सफाई कार्य कर रहे कर्मियों की सुरक्षा के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया है.
कर्मियों से काम पर लौटने की अपील
नगर आयुक्त ने कहा कि निगम के अधिकार क्षेत्र में आने वाली यूनियन की मांगों पर पहले ही आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं जबकि अन्य मांगों को संबंधित स्तर पर भेजा गया है. उन्होंने सफाई कर्मियों से शहर और जनहित को देखते हुए तुरंत काम पर लौटने की अपील की है.
वर्तमान में पटना नगर निगम में 647 स्थायी, 3,816 दैनिक और 4,822 आउटसोर्सिंग सफाई कर्मी कार्यरत हैं. निगम का कहना है कि उपलब्ध मानवबल और संसाधनों के सहारे राजधानी की सफाई व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं.
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