नीतीश कुमार ने साफ कहा कि बिहार राष्ट्रीय पार्टी जरूर है लेकिन उसका आधार बिहार ही है...
- नीतीश कुमार ने उम्मीद जताई कि चीजें अपने आप दुरुस्त हो जाएंगी
- बीजेपी से जुड़ने कानिर्णय मेरी उपस्थिति में लिया गया
- बिहर के संदर्भ को देखते हुए फैसला पार्टी के हित में लिया है
पटना:
जनता दल-यूनाइटेड (जेडीयू) के वरिष्ठ नेता शरद यादव के बिहार के बीजेपी के साथ गठबंधन होने से नाराज होने की खबरों के बीच सोमवार को नीतीश कुमार ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इशारों ही इशारों में समझाइश दी. उन्होंने साफ कहा कि जेडीयू राष्ट्रीय पार्टी जरूर है लेकिन उसका आधार बिहार ही है. इसलिए पार्टी के लिए बिहार के संदर्भ में क्या उचित है, उसे देखते हुए निर्णय लेकर बीजेपी से गठबंधन किया गया है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि चीजें अपने आप दुरुस्त हो जाएंगी. जेडीयू की बिहार इकाई महत्वपूर्ण है और यह निर्णय मेरी उपस्थिति में लिया गया. यदि किसी को तकलीफ है तो पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अपनी बात रख सकता है. माना जाता है कि नीतीश कुमार ने इशारों-इशारों में पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव को यह जताने की कोशिश की है उन्होंने फैसला पार्टी के हित में लिया है.
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उधर, शरद यादव की नाराजगी दूर होने का नाम नहीं ले रही है. उन्होंने मीडिया से कहा कि बिहार में महागठबंधन टूटने से मुझे काफी तकलीफ हुई है. महागठबंधन बनाने के लिए नीतीश, लालू और मैंने काफी मेहनत की थी. जनता का विश्वास किसी भी सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है.
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एनडीटीवी ने जब उनसे पूछा कि क्या बीजेपी से गठबंधन करने से पहले क्या आपकी राय ली गई थी? इस पर उन्होंने कहा कि इस सवाल पर कुछ भी कहना मेरे लिए ठीक नहीं होगा.'' सांसद वीरेंद्र कुमार और अली अनवर की भी नीतीश कुमार से नाराजगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि ''जो हालात हैं उसको लेकर मेरे मन में वेदना है.''
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शरद यादव से जब एनडीटीवी ने पूछा कि क्या आपने आगे के लिए कुछ सोचा है? तो उन्होंने कोई साफ उत्तर न देकर सिर्फ इतना कहा कि ''मैं इस बारे में अभी कुछ भी नहीं बोलूंगा.''
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लालू को ठहराया गठबंधन टूटने का दोषी
नीतीश कुमार ने कहा कि लालू अपने बेटे का बचाव करते रहे. मेरे ऊपर सवालिया निशान थे. फर्जी कंपनियों के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं थी.तेजस्वी से मुलाकात में भी मैंने कहा था कि आरोपों पर सफाई दें लेकिन वे सीबीआई के आरोपों पर सफाई देने को तैयार नहीं थे. जेडीयू के किसी नेता ने लालू यादव के खिलाफ बयान नहीं दिया. लालू ने कभी मुझसे बात नहीं की. 26 जून को जब आरजेडी ने अपना पुराना राग अलापा तो मैंने त्यागपत्र देने का निर्णय लिया. मेरे मन मे ये बात आई कि ये सरकार चलाना संभव नहीं है. मैंने लालू और सीपी जोशी से साफ कह दिया कि ये सरकार चलाना संभव नहीं है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि चीजें अपने आप दुरुस्त हो जाएंगी. जेडीयू की बिहार इकाई महत्वपूर्ण है और यह निर्णय मेरी उपस्थिति में लिया गया. यदि किसी को तकलीफ है तो पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अपनी बात रख सकता है. माना जाता है कि नीतीश कुमार ने इशारों-इशारों में पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव को यह जताने की कोशिश की है उन्होंने फैसला पार्टी के हित में लिया है.
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