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नेपाल की नई ऑनलाइन भंसार व्यवस्था से हड़कंप, घंटों फंसे यात्री... 2500 रुपये जुर्माने के डर से बढ़ी चिंता

नेपाल में प्रवेश के लिए कटाए गए भंसार को वापस भारत लौटते समय ऑनलाइन माध्यम से रद्द करना अनिवार्य है. यदि कोई वाहन मालिक ऐसा नहीं करता है तो उस पर प्रतिदिन 2500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. (सीतामढ़ी से रंजीत कुमार की रिपोर्ट)

नेपाल की नई ऑनलाइन भंसार व्यवस्था से हड़कंप, घंटों फंसे यात्री... 2500 रुपये जुर्माने के डर से बढ़ी चिंता
भारत-नेपाल बॉर्डर पर गाड़ियों की कतार
Bihar News:

नेपाल सरकार के नए आर्थिक वर्ष के बजट के बाद लागू की गई ऑनलाइन भंसार (कस्टम) प्रणाली सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है. सॉफ्टवेयर आधारित नई व्यवस्था के कारण भिट्ठामोड़ बॉर्डर सहित कई सीमावर्ती चेकपोस्टों पर अफरा-तफरी का माहौल है. भंसार प्रक्रिया प्रभावित होने से निजी और वाणिज्यिक वाहनों की आवाजाही पर अस्थायी रूप से ब्रेक लग गया है, जिससे नेपाल जाने वाले यात्रियों, पर्यटकों और रिश्तेदारों से मिलने जाने वाले लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

भारत-नेपाल आवाजाही को मुश्किल बना दिया

बीते रविवार और फिर सोमवार को भी भिट्ठामोड़ बॉर्डर पर सुबह से लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं. सुरसंड, चिकनी, बिंदी, भिट्ठा पूर्वी, गोपालपुर, नवाही और बिररख समेत आसपास के गांवों से पहुंचे लोग घंटों तक ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने के लिए जूझते रहे. स्थानीय लोगों का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच वर्षों पुराने बेटी-रोटी के संबंध हैं, लेकिन नए डिजिटल नियमों ने आम लोगों की सहज आवाजाही को मुश्किल बना दिया है.

भंसार रद्द नहीं कराने पर प्रतिदिन 2500 रुपये का जुर्माना

सबसे अधिक चिंता नए जुर्माना प्रावधान को लेकर है. नियम के अनुसार, नेपाल में प्रवेश के लिए कटाए गए भंसार को वापस भारत लौटते समय ऑनलाइन माध्यम से रद्द करना अनिवार्य है. यदि कोई वाहन मालिक ऐसा नहीं करता है तो उस पर प्रतिदिन 2500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. इतना ही नहीं, बकाया जुर्माना रहने पर भविष्य में नेपाल प्रवेश के दौरान वाहन जब्त भी किया जा सकता है. नए सिस्टम में एक वाहन को अधिकतम 30 दिनों का ही भंसार दिए जाने का प्रावधान है.

सॉफ्टवेयर समस्या से अगले दिन तक लगी रही लाइन

रविवार सुबह सात बजे से ही लोग भंसार कार्यालय में लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर ऑनलाइन आवेदन भरने में जुटे रहे. उन्हें गंतव्य, यात्रा का उद्देश्य, ठहरने का स्थान और अवधि जैसी जानकारी भरनी थी, लेकिन सर्वर और सॉफ्टवेयर संबंधी समस्याओं के कारण कई लोग शाम तक हर अगले दिन तक भी प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके. परेशान होकर अनेक यात्रियों को वापस लौटना पड़ा.

सुरसंड निवासी विजय महतो ने बताया कि उन्हें जलेश्वर में एक रिश्तेदार के मुंडन संस्कार में शामिल होना था, लेकिन भंसार नहीं कटने के कारण उन्होंने सीमा पर ही 3000 रुपये देकर नेपाली स्कॉर्पियो रिजर्व की और परिजनों को भेजकर स्वयं लौट आए.

हालांकि जलेश्वर भंसार कार्यालय के प्रमुख राजेंद्र बैसनती ने कहा कि यह व्यवस्था यात्रियों की सुविधा और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए लागू की गई है. लोगों को जागरूक किया जा रहा है और एक-दो दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है. फिलहाल सीमा क्षेत्र के लोगों में इस नई डिजिटल व्यवस्था को लेकर नाराजगी और असमंजस का माहौल बना हुआ है.

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संदीप कुमार
Chief Sub Editor
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