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Bihar: फर्जी B.Ed डिग्री पर सालों से वेतन ले रही थी प्रिंसिपल, शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप

डीईओ ने भी स्वीकार किया है कि फर्जी महाविद्यालय की डिग्री के आधार पर प्रशिक्षित वेतन लेने का आरोप लगा है और अब विभागीय प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. (मधेपुरा से रमन कुमार की रिपोर्ट)

Bihar: फर्जी B.Ed डिग्री पर सालों से वेतन ले रही थी प्रिंसिपल, शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
प्रिंसिपल के फेक B.Ed डिग्री का खुलासा
Bihar News:

बिहार में शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े के कई मामले सामने आ चुके हैं. लेकिन ताजा मामले ने पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है. दरअसल, मधेपुरा जिले में चर्चित बीएल इंटर विद्यालय, मुरलीगंज की प्रभारी प्रधानाध्यापिका (Principal) कविता नंदिनी सालों से फर्जी B.Ed डिग्री के सहारे वेतन ले रही थी. प्रिंसिपल पर आरोप लगने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा है. कटिहार निवासी मुन्ना कुमार की शिकायत के बाद अब विभागीय कार्रवाई तेज हो गई है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है.

आरोप है कि कविता नंदिनी सरकार ने अमान्य घोषित आरए बीएड कॉलेज, कुंजौरी आलमनगर से B.Ed की डिग्री हासिल कर प्रशिक्षित शिक्षक का वेतनमान प्राप्त किया. शिकायतकर्ता का दावा है कि जिस संस्थान से डिग्री ली गई, उसकी मान्यता संदिग्ध रही है, इसके बावजूद वर्षों तक सरकारी खजाने से वेतन लिया जाता रहा.

शिकायत के बाद भी दबाई गई फाइलें

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब यह सामने आया कि माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशक संजीव कुमार ने 5 मार्च 2026 को ही जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र भेजकर आरोप पत्र गठित करने और विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था. लेकिन आरोप है कि संबंधित फाइल को लंबे समय तक दबाकर रखा गया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई.

डीएम के हस्तक्षेप के बाद हुआ खुलासा

बाद में शिकायतकर्ता ने सीधे जिला पदाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई. डीएम के हस्तक्षेप के बाद पूरे मामले ने फिर से तूल पकड़ लिया. इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने प्रभारी प्रधानाध्यापिका के खिलाफ परपत्र ‘क' गठित कर विभाग को भेज दिया है. डीईओ ने भी स्वीकार किया है कि फर्जी महाविद्यालय की डिग्री के आधार पर प्रशिक्षित वेतन लेने का आरोप लगा है और अब विभागीय प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

हालांकि कैमरे के सामने कविता नंदिनी सरकार ने आरोपों पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शिक्षा विभाग इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह चर्चित फाइल एक बार फिर ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी.

फिलहाल पूरे जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग यह जानना चाहते हैं कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो सरकारी राशि की वसूली और कानूनी कार्रवाई कब तक होगी.

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