विवादित जमीन का मालिकाना हक जिस कंपनी के पास है, उसके निदेशक लालू के दोनों बेट और राबड़ी देवी हैं.
पटना:
पटना से लगे क्षेत्र में दो एकड़ जमीन जिसकी कीमत करीब 30 करोड़ रुपये है, राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू यादव के परिवार के नाम है. विपक्ष ने आरोप लगाया कि यही जमीन कई घोटालों की असली वजह है. बिहार में विपक्ष के नेता सुशील मोदी का कहना है दस्तावेजों से पता चलता है कि किस तरह से यह जमीन अवैध तरीके से यादव परिवार को हस्तांतरित की गई. अब इस जमीन पर मॉल का निर्माण कार्य जारी है. विपक्ष का आरोप है कि लालू यादव के बेटों के नाम से पटना की जिस जमीन पर मॉल का निर्माण कार्य जारी है न केवल उसकी मिटटी पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान से जबरदस्ती खरीदवाई गई. इस जमीन का मालिकाना हक जिस कंपनी के पास है उसके निदेशक लालू के दोनों बेट और राबड़ी देवी हैं.
2008 में यह जमीन सरला गुप्ता को बेची गई थी जिनके पति प्रेम गुप्ता लालू की पार्टी से सांसद हैं. सरला गुप्ता 'डिलाइट मार्केटिंग कंपनी' की मालकिन थी. इस जमीन को तीन भाइयों हर्ष, विनय और विजय कोचर ने बेचा था जो कि चाणक्य होटल के मालिक हैं. यह बिक्री चाणक्या को रेलवे के रांची और पुरी के दो होटलों को लीज पर चलाने की अनुमति मिलने के दो माह पहले हुई थी. उस समय लालू यादव, यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे.
मोदी ने आरोप लगाया कि यह महज संयोग नहीं है कि चाणक्य ने यह जमीन होटल चलाने का ठेका मिलने के पहले बेची. हालांकि, लालू की पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चाणक्या ने जबर्दस्त बोली लगाई थी और 15 साल के लिए रेलवे से होटल का ठेका निष्पक्ष तरीके से हासिल किया था. 2104 में, तेज प्रताप और तेजस्वी यादव और बहन चंदा यादव को इस कंपनी के निदेशक को तौर पर जोड़ा गया. फिर इस कंपनी में राबड़ी देवी को निदेशक बनाया गया. इस वर्ष फरवरी में एक और विलय हुआ जिसमें राबड़ी देवी और उनके बेटे निदेशक हैं. सभी कंपनियां एक ही पते पर दर्ज हैं. मोदी ने आरोप लगाया कि इसी जमीन पर राजद के सुरसंड से विधायक सैयद अबु दौजाना की कंपनी 'मेरिडियन कंस्ट्रक्शन (इंडिया) लिमिटेड' द्वारा शॉपिंग मॉल का निर्माण करवाया जा रहा है जिसे बिहार का सबसे बड़ा मॉल बताया जा रहा है.
विपक्ष के नेता सुशील मोदी का कहना है कि इससे साफ है कि लालू यादव ने जो जमीन दी है वह रेलवे की संपत्ति है. वहीं लालू के करीबी नेताओं का कहना है कि लल्लन सिंह और शिवानंद तिवारी इस मामले को लेकर पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जा चुके है, जहां उनकी सीबीआई जांच की मांग ख़ारिज हो चुकी है.
वहीं जानकर मानते हैं कि मॉल का निर्माण लालू यादव और उनके महागठबंधन के लिए राजैनतिक रूप से महंगा पड़ सकता है. मिटटी के बहाने बैठे बिठाये बिहार में विपक्ष को एक मुद्दा मिल गया. वहीं राष्ट्रीय जनता दल के नेता भी मानते हैं कि मोदी और योगी के जमाने में उनके सुप्रीमो अगर परिवार के सदस्य के नाम पर मॉल का निर्माण करते हैं तो चुनाव में उनकी नैया को डूबने से कोई नहीं बचा सकता.
इस बीच इस मुद्दे पर विवाद गहराता जा रहा है कि 45 लाख की मिट्टी की खरीद बिना निविदा के मात्र कोटेशन के आधार पर कैसे की गई. वन विभाग जिसके तहत यह जैविक उद्यान आता है उसके अधिकारी भी मानते हैं कि हाल के वर्षों में इतनी अधिक राशि का खर्च मात्रा कोटेशन के आधार पर करने की कोई परंपरा उन्हें याद नहीं, लेकिन इस पूरे विवाद के केंद्र में पटना चिड़ियाघर के निदेशक नन्द किशोर का दावा है कि सब कुछ नियम संगत किया गया है और उन्होंने कहा कि जिस ठेकेदार ने मिटटी की आपूर्ति की है उसका कहना है कि उन्होंने मिट्टी निर्माणाधीन मॉल की साइट से नहीं ली है.
2008 में यह जमीन सरला गुप्ता को बेची गई थी जिनके पति प्रेम गुप्ता लालू की पार्टी से सांसद हैं. सरला गुप्ता 'डिलाइट मार्केटिंग कंपनी' की मालकिन थी. इस जमीन को तीन भाइयों हर्ष, विनय और विजय कोचर ने बेचा था जो कि चाणक्य होटल के मालिक हैं. यह बिक्री चाणक्या को रेलवे के रांची और पुरी के दो होटलों को लीज पर चलाने की अनुमति मिलने के दो माह पहले हुई थी. उस समय लालू यादव, यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे.
मोदी ने आरोप लगाया कि यह महज संयोग नहीं है कि चाणक्य ने यह जमीन होटल चलाने का ठेका मिलने के पहले बेची. हालांकि, लालू की पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चाणक्या ने जबर्दस्त बोली लगाई थी और 15 साल के लिए रेलवे से होटल का ठेका निष्पक्ष तरीके से हासिल किया था. 2104 में, तेज प्रताप और तेजस्वी यादव और बहन चंदा यादव को इस कंपनी के निदेशक को तौर पर जोड़ा गया. फिर इस कंपनी में राबड़ी देवी को निदेशक बनाया गया. इस वर्ष फरवरी में एक और विलय हुआ जिसमें राबड़ी देवी और उनके बेटे निदेशक हैं. सभी कंपनियां एक ही पते पर दर्ज हैं. मोदी ने आरोप लगाया कि इसी जमीन पर राजद के सुरसंड से विधायक सैयद अबु दौजाना की कंपनी 'मेरिडियन कंस्ट्रक्शन (इंडिया) लिमिटेड' द्वारा शॉपिंग मॉल का निर्माण करवाया जा रहा है जिसे बिहार का सबसे बड़ा मॉल बताया जा रहा है.
विपक्ष के नेता सुशील मोदी का कहना है कि इससे साफ है कि लालू यादव ने जो जमीन दी है वह रेलवे की संपत्ति है. वहीं लालू के करीबी नेताओं का कहना है कि लल्लन सिंह और शिवानंद तिवारी इस मामले को लेकर पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जा चुके है, जहां उनकी सीबीआई जांच की मांग ख़ारिज हो चुकी है.
वहीं जानकर मानते हैं कि मॉल का निर्माण लालू यादव और उनके महागठबंधन के लिए राजैनतिक रूप से महंगा पड़ सकता है. मिटटी के बहाने बैठे बिठाये बिहार में विपक्ष को एक मुद्दा मिल गया. वहीं राष्ट्रीय जनता दल के नेता भी मानते हैं कि मोदी और योगी के जमाने में उनके सुप्रीमो अगर परिवार के सदस्य के नाम पर मॉल का निर्माण करते हैं तो चुनाव में उनकी नैया को डूबने से कोई नहीं बचा सकता.
इस बीच इस मुद्दे पर विवाद गहराता जा रहा है कि 45 लाख की मिट्टी की खरीद बिना निविदा के मात्र कोटेशन के आधार पर कैसे की गई. वन विभाग जिसके तहत यह जैविक उद्यान आता है उसके अधिकारी भी मानते हैं कि हाल के वर्षों में इतनी अधिक राशि का खर्च मात्रा कोटेशन के आधार पर करने की कोई परंपरा उन्हें याद नहीं, लेकिन इस पूरे विवाद के केंद्र में पटना चिड़ियाघर के निदेशक नन्द किशोर का दावा है कि सब कुछ नियम संगत किया गया है और उन्होंने कहा कि जिस ठेकेदार ने मिटटी की आपूर्ति की है उसका कहना है कि उन्होंने मिट्टी निर्माणाधीन मॉल की साइट से नहीं ली है.
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