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This Article is From Jun 27, 2017

लालू में गठबंधन तोड़ने की हिम्मत नहीं! सुशील मोदी के बयान पर भड़के तेजस्वी यादव

बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी पर लगाई आरोपों की झड़ी

लालू में गठबंधन तोड़ने की हिम्मत नहीं! सुशील मोदी के बयान पर भड़के तेजस्वी यादव
बीजेपी नेता सुशील मोदी के बयान पर बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है.
  • कहा- लालू ने अंगद की तरह पांव जमाकर बिहार को संघी आग से बचाया
  • मोदी गठबंधन टूटने की बात कहकर बीजेपी कार्यकर्ताओं को गुमराह कर रहे
  • आडवाणी खेमे के होकर भी मोदी-शाह की चापलूसी के महल खड़ा करते हैं
पटना: बिहार में सत्तासीन जेडीयू-आरजेडी गठबंधन में दरार और वाक युद्ध के दौर में बिहार के बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी के बयान पर आरजेडी की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई है. उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मोदी के बयान का विस्तार से जवाब दिया है. उन्होंने मोदी से कहा है कि वे गठबंधन टूटने की बात कहकर बीजेपी के कार्यकर्ताओं को गुमराह कर रहे हैं ताकि वे उनके आगे-पीछे घूमते रहें.     

तेजस्वी यादव ने कहा है कि सुशील मोदी जी ने कल कहा कि लालू प्रसाद जी में हिम्मत नहीं है कि वे गठबंधन तोड़ दें. हंसी आती है इनकी बातों पर. हिम्मत की बात भी सुशील मोदी उस शख्स से कर रहे हैं जिसने लगातार तीन दशक से भाजपा की नकारात्मक राजनीति के मंसूबों को रौंदा है. उसी लालू प्रसाद ने अंगद की तरह पांव जमाकर बिहार को संघी आग से लगातार बचाया है. सुशील मोदी जरा उस सूरमा का नाम तो बताएं जिसने आडवाणी के साम्प्रदायिक रथ का चक्का जाम कर दिया? देश में किसके पास थी इतनी हिम्मत? उसी रथयात्रा के प्रबंधक नरेंद्र मोदी जब दो दशक बाद अपनी सारी ताकत झोंककर बिहार जीतने आए तो किसने अपनी हिम्मत से उनके सारे सपनों को मसल दिया?

तेजस्वी ने सुशील मोदी से कहा है कि आपकी हिम्मत कहां गुम हो जाती है जब आडवाणी खेमे का होने के बावजूद अपनी राजनीति बचाने के लिए खून का घूंट पीकर भी आज मोदी-शाह की चापलूसी के महल खड़ा करते नजर आते हैं? अरे, हिम्मती तो वो होता है जो विषमताओं से लड़ते हुए सिद्धांतों के लिए खत्म हो जाता है, सूखी रोटी खा लेता है पर चापलूसी की बीन नहीं बजाता है. हिम्मत क्या होती है यह आप क्या जानें? जब नरेंद्र मोदी के सम्मान में आयोजित भोज को रद्द किया गया तो आपकी हिम्मत कहां विचरण कर रही थी? अगर हिम्मत थी तो, तोड़ देते गठबंधन. त्याग देते उप मुख्यमंत्री पद. छोड़ देते सत्ता की मलाई!

उप मुख्यमंत्री ने कहा है कि सुशील मोदी जी, आडवाणी खेमे का होने का यह मतलब तो नहीं कि पार्टी के नेताओं का पक्ष भी न लें?

अगर हिम्मत थी तो आपके सांसद और अन्य नेताओं के पैसे लेकर टिकट बांटने के आरोप पर पार्टी से इस्तीफा क्यों नहीं दिया? लोकसभा चुनाव में गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे के वाजिब क्रोध का जवाब देते क्यों नहीं बना? भोला सिंह, कीर्ति आजाद, गोपाल नारायण सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा के वाजिब और तर्कपूर्ण आरोपों पर तथ्य दर तथ्य जवाब क्यों नहीं देते? हिम्मत की बात सकारात्मक लोग करते हैं, नकारात्मक नहीं.

उन्होंने मोदी से कहा है कि महागठबंधन मजे से चल रहा है, आप गठबंधन टूटने की बात कर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को गुमराह करते हैं ताकि वे आपके इर्द-गिर्द मंडराते रहें और आपकी कागजी ताकत में कोई कमी न आ सके.
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