बिहार के गोपालगंज में 5 हजार 639 शिक्षकों के नदारद रहने से हड़कंप मच गया है. हैरान करने वाली बात है कि इन सभी शिक्षकों को ऑनलाइन हाजिरी में ऑन-ड्यूटी बताया गया. जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में शिक्षकों की उपस्थिति रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में भारी अंतर है. ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में गड़बड़ी सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है. रिकॉर्ड में करीब 445 शिक्षक ऑन ड्यूटी बताए गए, लेकिन वे स्कूल से गायब हैं. वहीं, 2400 शिक्षक बिना किसी सूचना के अनुपस्थित मिले. इसके अलावा 2 हजार 794 शिक्षक निर्धारित समय के बाद स्कूल पहुंचे और देर से अपनी उपस्थिति दर्ज की.
शिक्षकों का तर्क- जनगणना में लगे थे
जब इन शिक्षकों से सवाल पूछा गया तो कई शिक्षकों ने अलग-अलग तर्क दिए. कुछ शिक्षकों का कहना है किकि वे स्कूल ड्यूटी के साथ-साथ जनगणना कार्य में भी लगे हुए थे, इसकी वजह से उन्होंने 'मार्क ऑन ड्यूटी' दर्ज किया. हालांकि विभाग ने इसे संतोषजनक कारण नहीं माना है. साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जनगणना जैसे कार्य स्कूल टाइम से पहले या बाद में किए जाएं.
प्रिंसिपल भी सवालों के घेरे में
सिर्फ शिक्षक ही नहीं, बल्कि स्कूलों के प्रिंसिपल की भूमिका भी संदेह के घेरे में है. विभाग का कहना है कि कई जगहों पर गड़बड़ी की जानकारी होने के बावजूद उसे रोका नहीं गया और न ही उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया. ऐसे में प्रिंसिपल की लापरवाही पर भी सवाल है.
72 घंटे के भीतर मांगा जवाब
जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार ने सभी संबंधित शिक्षकों और प्रिंसिपल से 72 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है. इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग कार्यालय में अचानक भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां शिक्षक नोटिस का जवाब तैयार करने में जुटे नजर आए. पूरे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला. उन्होंने चेतावनी दी है कि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा. साथ ही वेतन रोकने की भी कार्रवाई की जा सकती है.
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