- बीपीएससी टीआरई-चार शिक्षक भर्ती विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं.
- पटना में प्रदर्शन शुरू होने से पहले पुलिस ने कई अभ्यर्थियों को हिरासत में ले लिया और सुरक्षा कड़ी की.
- अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार उनकी मांग पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं कर रही है और प्रदर्शन करने से रोका जा रहा.
बिहार में BPSC TRE-4 शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर एक बार फिर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज हो गया है. बुधवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पटना में प्रदर्शन के लिए जुटे, लेकिन प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई अभ्यर्थियों को हिरासत में ले लिया. इस दौरान महिला अभ्यर्थियों को भी जबरन हटाए जाने की तस्वीरें सामने आईं, जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी और बढ़ गई.
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से TRE-4 वैकेंसी का विज्ञापन जारी करने की मांग कर रहे हैं. लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है. इसी मांग को लेकर वे पटना में जुटे थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे. प्रदर्शन से पहले ही पुलिस ने छात्र नेता खुशबू पाठक को हिरासत में ले लिया और इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई. पटना कॉलेज और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया, साथ ही एहतियातन वाटर कैनन भी लगाए गए.
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी मांग रखने का मौका भी नहीं दिया जा रहा है. उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें प्रदर्शन करने से भी रोका जा रहा है. एक अभ्यर्थी ने कहा कि उन्हें उनका हक नहीं मिल रहा है, जबकि वे केवल भर्ती प्रक्रिया शुरू होने और विज्ञापन जारी करने की मांग कर रहे हैं.
इसी दिन शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी बिहार बोर्ड कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने पूछताछ-सह-शिकायत निवारण केंद्र का उद्घाटन किया. इस दौरान बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर भी मौजूद थे. कार्यक्रम के बाद जब पत्रकारों ने TRE-4 अभ्यर्थियों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल पूछे और यह जानना चाहा कि क्या अपनी मांग रखना गुनाह है, तो शिक्षा मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त करते हुए बिना जवाब दिए वहां से चले गए.
गौरतलब है कि इससे पहले 8 मई को भी TRE-4 अभ्यर्थियों ने पटना कॉलेज से जेपी गोलंबर तक मार्च निकाला था, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हो गया था. उस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था और कई अभ्यर्थियों के घायल होने की खबर सामने आई थी. अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने उन्हें दौड़ाकर पीटा, जिसमें कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं और महिला अभ्यर्थियों के साथ भी बदसलूकी हुई. उस दिन की तस्वीरों में सड़क पर बिखरी चप्पलें, खून से सने कपड़े और घायल छात्र दिखाई दिए थे.
अब एक बार फिर TRE-4 को लेकर आंदोलन तेज हो गया है. अभ्यर्थियों की मांग है कि जल्द से जल्द भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि शिक्षक बनने का उनका इंतजार खत्म हो सके. हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई नई घोषणा सामने नहीं आई है.
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