पूर्णिया के लोकसभा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. हाल ही में महिलाओं को लेकर कथित तौर पर विवादित बयान देने के मामले में वह चारों तरफ से घिरते नजर आ रहे हैं. महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी पर एनडीए सरकार और विपक्ष दोनों ओर के नेताओं ने विरोध किया है. वहीं महिला आयोग की नोटिस को लेकर पप्पू यादव ने कहा है कि उसे कूड़े में फेंक दिया है. जबकि बिहार राज्य महिला आयोग ने नोटिस का जवाब 3 दिनों में दाखिल करने को कहा है.
संसदीय सदस्यता खत्म करने की मांग
अब इस मामले में पप्पू यादव की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की जा रही है. बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने उनकी संसदीय सदस्यता खत्म करने की मांग करते हुए कहा, पप्पू यादव ने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया, वे इतने शर्मनाक थे कि उन्हें दोहराते हुए भी मुझे शर्म महसूस हो रही है. यह हमारा देश है, जहां महिलाओं की पूजा दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, काली और कई अन्य रूपों में की जाती है. महिलाओं के लिए उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों का लोकसभा अध्यक्ष को संज्ञान लेना चाहिए.
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी पप्पू यादव की टिप्पणी पर पर कहा कि मैं इस तरह की सोच में नहीं पड़ना चाहता. मेरा और मेरी पार्टी का मानना है कि जहां महिलाओं की पूजा होती है, वहीं ईश्वर का वास होता है.
महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों. पुलिस और केंद्र और राज्य महिला आयोगों द्वारा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. ऐसे लोगों को हमेशा के लिए जेल में डाल देना चाहिए.
जेडीयू विधायक शालिनी मिश्रा ने कहा, उन्होंने जो कुछ भी कहा, वह उनकी मानसिकता को दर्शाता है. इसकी निंदा करना तो बहुत छोटी बात होगी. उन्होंने न केवल बिहार की महिलाओं का, बल्कि पूरे देश की महिलाओं का अपमान किया है. उन्हें माफी मांगनी चाहिए; अन्यथा, हम सभी महिलाएं विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर आएंगी.
पप्पू यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी सफाई
पूर्णिया के सांसद ने अपनी टिप्पणियों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई देते हुए कहा कि जिन महिलाओं ने अपनी मेहनत से तरक्की की है, चाहे वे डॉक्टर हों या इंजीनियर, उन्हें आगे आना चाहिए. आज भारत में 90 प्रतिशत महिलाएं हमारी बात का समर्थन कर रही हैं. जब इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं हमारे साथ खड़ी हैं, तो फिर डर किस बात का?
उन्होंने आगे कहा, "हमने किसी का नाम नहीं लिया; हमने सामान्य तौर पर सभी महिलाओं के बारे में बात की. हमने यह भी कहा कि बाकी बचे 10 प्रतिशत लोगों में भी अच्छे लोग हैं. तो फिर आपको इतनी ठेस क्यों पहुंची?"
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