- डॉ. राहुल राज ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना और उनका समाधान कराना है
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से करीब बीस मिनट की बैठक में शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक चर्चा हुई और समर्थन मिला
- राहुल राज ने स्पष्ट किया कि सरकार का समर्थन देने और किसी पार्टी की सदस्यता लेने में स्पष्ट अंतर होता है
बिहार विधान परिषद के सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित एमएलसी डॉ. राहुल राज ने विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर खुलकर अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ सदस्यता रद्द करने की मांग राजनीतिक वजहों से की जा रही है और इसका वास्तविक मुद्दों से कोई संबंध नहीं है.
एनडीटीवी इंडिया से बातचीत में राहुल राज ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की समस्याओं और मांगों को सरकार तक पहुंचाना है. उन्होंने साफ किया कि इसके लिए मुख्यमंत्री और सरकार के अन्य वरिष्ठ नेताओं से मिलना कोई गलत बात नहीं है.
मुख्यमंत्री से मिलने का किया बचाव
डॉ. राहुल राज ने कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने शिक्षकों से जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है. उनके अनुसार शिक्षकों की कई मांगें ऐसी हैं जिन्हें सरकार के सहयोग के बिना पूरा नहीं कराया जा सकता. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनकी करीब 20 मिनट की मुलाकात हुई थी, जिसमें शिक्षकों के मुद्दों को विस्तार से रखा गया. राहुल राज ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इन मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया और न्यायसंगत मांगों को पूरा कराने का भरोसा भी दिया.
विपक्ष के आरोपों को बताया राजनीतिक
विपक्षी दलों का आरोप है कि डॉ. राहुल राज और वंशीधर ब्रजवासी भाजपा में शामिल हो गए हैं. इसी आधार पर उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की जा रही है. इस पर राहुल राज ने कहा कि वह पिछले 15 वर्षों से एक विचारधारा से जुड़े रहे हैं और यह बात किसी से छिपी नहीं है. उन्होंने कहा कि शिक्षकों के हित में उन्होंने एनडीए सरकार को समर्थन दिया है, लेकिन समर्थन देने और किसी पार्टी की सदस्यता लेने में फर्क होता है. उनके मुताबिक विपक्ष इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है.
'समर्थन और शामिल होने में अंतर है'
राहुल Raj ने दोहराया कि वह आगे भी मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और एनडीए के नेताओं से मिलते रहेंगे. उनका कहना है कि यदि शिक्षकों को न्याय दिलाने के लिए सरकार से संवाद करना पड़ता है तो वह ऐसा करते रहेंगे.
उन्होंने कहा, "मैं बार-बार कह रहा हूं कि शामिल होने और समर्थन देने में अंतर होता है. शिक्षकों के हितों के लिए मैं मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और अन्य नेताओं से मिलता रहूंगा." डॉ. राहुल राज ने दावा किया कि विपक्ष के पास फिलहाल कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, इसलिए इस मामले को तूल दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि उनका पूरा ध्यान शिक्षकों की मांगों को पूरा कराने पर है और वह आगे भी इसी दिशा में काम करते रहेंगे.
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