सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 से फायरिंग के विवाद ने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए थे. घटना का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच इस बात पर बहस शुरू हो गई कि क्या भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ऐसे हथियारों का इस्तेमाल जरूरी था. अब इसी विवाद के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय ने भीड़ और प्रदर्शनों से निपटने के नियमों में अहम बदलाव किया है.
AK-47 और INSAS का इस्तेमाल होगा आखिरी विकल्प
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी नए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि प्रदर्शन, धरना या भीड़ नियंत्रण के दौरान AK-47, INSAS और SLR जैसे घातक हथियारों का सामान्य परिस्थितियों में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. इन हथियारों को केवल उस स्थिति में उपयोग करने की अनुमति होगी जब हालात पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाएं और लोगों या सुरक्षाबलों की जान को गंभीर खतरा पैदा हो.
पुलिस अधिकारियों को पहले कम घातक और सामान्य तरीकों से स्थिति संभालने की कोशिश करने के निर्देश दिए गए हैं. इसका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना है, न कि अनावश्यक रूप से जोखिम बढ़ाना.
छात्र आंदोलन के बीच आया अहम फैसला
बिहार में इन दिनों छात्र आंदोलन लगातार चर्चा में है. पटना समेत कई जिलों में छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, रोजगार और डोमिसाइल नीति जैसे मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. कई संगठनों ने आगे भी आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं. ऐसे माहौल में पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती है. प्रशासन चाहता है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से हों और किसी भी स्थिति में आम लोगों की सुरक्षा प्रभावित न हो.
विपक्ष ने उठाए थे गंभीर सवाल
सीवान की घटना के बाद विपक्ष ने सरकार और पुलिस दोनों को घेरा था. आरजेडी समेत कई विपक्षी दलों ने सवाल उठाया कि छात्र प्रदर्शन के दौरान इतनी बड़ी कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी मामले को गंभीर बताते हुए सरकार से जवाब मांगा था. विपक्ष का आरोप था कि छात्रों की आवाज सुनने के बजाय प्रशासन सख्ती का रास्ता अपना रहा है. इसी वजह से पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था.
पुलिस के सामने नई चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आदेश जारी करना ही काफी नहीं होगा. अधिकारियों और जवानों को यह भी स्पष्ट रूप से समझाना होगा कि किस परिस्थिति में कौन सा कदम उठाया जाए. यदि कोई प्रदर्शन हिंसक हो जाता है, पथराव या तोड़फोड़ शुरू हो जाती है, तब पुलिस की प्रतिक्रिया क्या होगी, इसके स्पष्ट मानक तय करना जरूरी है.
यह भी पढ़ें- दिल्ली में 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक बंद रहेगा निर्माण कार्य, प्रदूषण रोकने के लिए सरकार का एक्शन प्लान
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं