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This Article is From Nov 20, 2025

नीतीश कैबिनेट में फिर से नितिन नबीन.. बीजेपी का युवा चेहरा, यूं मिला मौका

Nitish Kumar Cabinet Oath Ceremony: नितिन नबीन ऐसा नाम रहा जिसने पूरे आत्मविश्वास के साथ न सिर्फ अपनी सीट को संभाले रखा, बल्कि पांच बार लगातार जीतकर बीजेपी के शहरी और प्रबुद्ध वोट बैंक को एक स्थायी संबल दिया. 

नीतीश कैबिनेट में फिर से नितिन नबीन.. बीजेपी का युवा चेहरा, यूं मिला मौका
  • नीतीश कुमार 20 नवंबर को दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ पटना के गांधी मैदान में लेंगे
  • नितिन नबीन को फिर से कैबिनेट में जगह मिलेगी, उन्होंने पांच बार लगातार बांकीपुर से जीत हासिल की है
  • सड़क निर्माण मंत्री के रूप में नितिन नबीन ने जमीन पर काम दिखाने, जनता की जरूरतों को तरजीह देने की छवि बनाई

Nitish Kumar Cabinet Oath Ceremony: जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार ने गुरुवार, 20 नवंबर को रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. पटना का गांधी मैदान एक बार फिर इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना है. इस बार नीतीश कैबिनेट में कई पुराने चेहरों के साथ नए नामों को भी जगह मिली है. बीजेपी कोटे से पिछले सरकार में पथ निर्माण मंत्री रहे नितिन नबीन ने एक बार फिर कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है. चलिए आपको यहां बताते हैं कि कैसे बांकीपुर को नितिन नबीन ने बीजेपी के लिए किला बना लिया है और अपने काम से लंबी छलांग लगाने को तैयार दिख रहे हैं.

नितिन नबीन: बांकीपुर से उठता एक स्थिर, शांत और मज़बूत राजनीतिक चेहरा 

 बिहार की राजनीति अपने स्वभाव में जितनी जटिल है, उतनी ही बदलती हुई भी. हर चुनाव यहां नई दिशा, नया संदेश और नए समीकरण लेकर आता है. लेकिन इस शोर, बदलाव और अस्थिरता के बीच कुछ चेहरों की मौजूदगी ऐसी होती है जो राजनीति को निरंतरता भी देती है और जनता को भरोसा भी. नितिन नबीन ऐसा ही एक नाम है एक ऐसा चेहरा जिसने पूरे आत्मविश्वास के साथ न सिर्फ अपनी सीट को संभाले रखा, बल्कि पाँच बार लगातार जीतकर बीजेपी के शहरी और प्रबुद्ध वोट बैंक को एक स्थायी संबल दिया. 

 2025 का बांकीपुर चुनाव कई मायनों में दिलचस्प था. राजनीतिक हवाएं बदल रही थीं, समीकरण टूट रहे थे, नए चेहरे उभर रहे थे, लेकिन इस सबके बीच अगर कोई चीज अडिग रही तो वह थी नितिन नबीन के प्रति जनता का विश्वास. इस बार उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 47,524 वोटों के भारी अंतर से हराया. उन्हें मिले 1,00,485 वोट सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह उस भरोसे की अभिव्यक्ति है जो बांकीपुर के लोगों ने वर्षों में उनके काम और सुलभता पर बनाया है.

स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि “बांकीपुर में बीजेपी का किला सिर्फ संगठन ने नहीं, नितिन नबीन ने अपने व्यक्तिगत संपर्क, सरल व्यवहार और काम के बल पर मजबूत किया है.”

विरासत में मिली राजनीति 

नितिन नबीन की राजनीतिक यात्रा अचानक नहीं बनी. वह अपने पिता,दिवंगत भाजपा नेता की विरासत लेकर आए. वह विरासत थी जनसेवा की, शुचिता की और राजनीतिक सादगी की. 2006 के उपचुनाव में पहली जीत के बाद उन्होंने एक-एक कदम बहुत संतुलन से रखा. 2008 के परिसीमन के बाद नए बने बांकीपुर में भी पार्टी ने उन पर भरोसा किया, और उन्होंने हर बार उस भरोसे को दोगुना होकर लौटाया. 

 साल 2010, 2015, 2020 और अब 2025, लगातार पांच जीतें किसी भी नेता के लिए सिर्फ उपलब्धि नहीं, बल्कि जनता के मन में उनके प्रति गहराई से जमे विश्वास का प्रमाण है. बिहार में कायस्थ समुदाय की संख्या भले कम हो, पर उनकी बौद्धिक उपस्थिति, प्रशासनिक पकड़ और शहरी नेतृत्व में भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है. नितिन नबीन ने इस भूमिका को न सिर्फ निभाया है, बल्कि और मजबूत किया है. 

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, “जहां कई जगह कायस्थ वोटों में असंतोष देखा गया, वहीं बांकीपुर में नितिन नबीन ने उन्हें एकजुट रखा. यह बीजेपी की नजर में उनकी अहमियत को और बढ़ाता है.” 

उनका शांत स्वभाव, संतुलित बयानबाज़ी और बिना विवादों के काम करने की छवि उन्हें कायस्थ समाज का स्वाभाविक और स्वीकार्य नेता बनाती है. बांकीपुर एक शहरी क्षेत्र है यहां लोग जाति से पहले काम देखते हैं. यहां की अपेक्षाएं अलग हैं सड़कें, साफ़-सफ़ाई, बिजली, जल-निकासी, ट्रैफिक समाधान, नागरिक सुविधाएं.

नितिन नबीन ने इन मुद्दों पर लगातार काम किया. एक स्थानीय निवासी का बयान इस बात को बिल्कुल स्पष्ट कर देता है,“वह सिर्फ हमारा विधायक नहीं, जरूरत पड़ने पर फोन उठाने वाला एक सुलभ नेता है.” 

सड़क निर्माण मंत्री के तौर पर भी उनकी छवि मजबूत हुई है. एक ऐसे मंत्री की तरह जो फाइलों के पीछे नहीं छुपता, बल्कि जमीन पर काम दिखाना चाहता है. बीजेपी ने जिन-जिन राज्यों में संगठनात्मक काम दिए, वह वहां भी सक्रिय भूमिका निभाते दिखाई दिए. यह संकेत है कि पार्टी उन्हें बिहार से आगे भी एक बड़े नेता के रूप में देख रही है. 

 यह चुनाव परिणाम सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि एक संदेश भी है कि बिहार का शहरी मतदाता काम, सुलभता और साफ़ छवि वाले नेताओं के साथ खड़ा है. नितिन नबीन इसी पैटर्न में फिट बैठते हैं- एक पढ़े-लिखे, शांत-गंभीर, संगठनात्मक रूप से सक्षम और बिना दिखावे वाला नेतृत्व.

अब सवाल है कि 

  • क्या बिहार की राजनीति में वे आगे और बड़ी भूमिका निभाएंगे? 
  • क्या बीजेपी उन्हें शहरी नेतृत्व और कायस्थ प्रतिनिधित्व का बड़ा चेहरा बनाना जारी रखेगी? 
  • क्या वे आने वाले वर्षों में राज्य की राजनीति में एक निर्णायक मोहरे के रूप में उभरेंगे? 

 इन सवालों के जवाब आने वाला समय देगा, लेकिन इतना तय है कि बांकीपुर से उठता यह शांत और दृढ़ चेहरा अब सिर्फ विधायक नहीं बल्कि बिहार में बीजेपी की सबसे स्थिर धुरियों में से एक बन चुका है.

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