बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में लचर होती शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर बयां करता एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रदेश के जिलों में संचालित हो रहे मॉडल स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तर को बयां किया है. इन स्कूलों को प्रदेश की बेहतर शिक्षा के केंद्र के रूप में सरकार के जरिए विकसित किया जाना है लेकिन आलम यह है कि यहां पढ़ाने के लिए शिक्षकों का टोटा पड़ा हुआ है. जिसका हालिया नजारा जिले में शिक्षक भर्ती के दौरान देखने को मिला. यहां के मॉडल स्कूल में 25 शिक्षकों के रिक्त पदों के लिए विभाग को केवल 5 ही आवेदन प्राप्त हुए. इसमें भी जांच के दौरान एक रिजेक्ट हो गया. बाकी बचे 4 में केलव 2 आवेदक प्रशासनिक इंटरव्यू के बाद अपनी जगह पक्की कर पाए हैं.
पदों के मुकाबले आवेदन न के बराबर
दरअसल. जिले में कुल 17 मॉडल स्कूल संचालित है. इन स्कूलों में पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों की तैनाती के लिए चरणबद्ध तरीके से पदों को भरे जाने की प्रक्रिया की जा रही है. इसी के लिए पहले चरण में 42 शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी. जिसके बाद दूसरे चरण में 25 शिक्षकों के खाली पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे. जिसमें केवल 9वीं - 10 वीं के शिक्षकों से आवेदन मांगे गए थे.
हैरानी की बात यह रही कि दूसरे चरण के इन 25 खाली पदों के लिए केवल 5 आवेदन ही विभाग को मिले. उसमें से भी 1 के आवेदक को उसकी अधिक उम्र को देखते हुए रिजेक्ट कर दिया गया जबकि शेष बचे 4 शिक्षकों का जब प्रशासनिक स्तर पर गठित कमेटी ने इंटरव्यू लिया, तो उनमें से केवल दो शिक्षक ही 50% से अधिक अंक हासिल कर पाए.
30 हजार शिक्षकों के होते हुए भी क्यों बनी ऐसी नौबत?
वहीं दूसरी तरफ, अब तीसरे चरण में नियुक्ति की तैयारी चल रही है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुजफ्फरपुर जिले में तकरीबन 30 हज़ार शिक्षक कार्यरत हैं और मॉडल स्कूल के लिए शिक्षा विभाग को 25 शिक्षक भी नहीं मिल पा रहा है.
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