आरजेडी नेता तेजप्रताप यादव.
- मिट्टी घोटाले में आया था तेज प्रताप का नाम
- अब सुशील मोदी के पास है मंत्रालय
- सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं.
पटना:
लगता है राजद अध्यक्ष लालू यादव और उनके परिवार के हर सदस्य के दिन अच्छे नहीं चल रहे हैं. पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को अगले छह हफ़्ते में मिट्टी घोटाला पर अपनी रिपोर्ट देने का आदेश दिया है. इस आदेश का प्रभाव पूर्व वन मंत्री तेजप्रताप यादव पर देखने को मिल सकता है. ये आदेश हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दिया. याचिकाकर्ता इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. ये मामला अप्रैल महीने से लम्बित था. कोर्ट के आदेश के बाद लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि वो ना केवल राज्य के वन मंत्री थे, बल्कि उन्हीं के आदेश से इस मिट्टी का सारा खेल हुआ था. हालांकि इस घोटाले के प्रकाश में आने के बाद आनन फ़ानन में एक जांच में वन विभाग के अधिकारियों को क्लीनचिट दे दिया गया था.
लेकिन जब से सरकार बदली और सुशील मोदी ने वन विभाग का कार्यभार सम्भाला तब विभाग के अधिकारियों के अनुसार उन्होंने कई ख़ामियां पकड़ी हैं. सबसे पहले जिस औचित्य के आधार पर मिट्टी ख़रीदी गई उसे बदला गया. जो मिट्टी के ख़रीद के लिए कोटेशन मंगाये गए वो सब एक दिन में 100-100 रुपए के अन्तर का है. इस मिट्टी से चिड़ियाघर के अंदर जिस सड़क का निर्माण कराया गया उसकी कोई ज़रूरत नहीं थी. वित्तीय नियमों का खुल्ल्म खुल्ला उल्लंघन किया गया.
यह भी पढ़ें : SC ने सीबीआई से पूछा- शहाबुद्दीन व तेज प्रताप के साथ मोहम्मद कैफ की फ़ोटो को लेकर क्या जांच की?
निश्चित रूप से राज्य सरकार अब उच्च न्यायालय में इन सभी बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट देगी. उम्मीद की जा रही है कि जमीन के इस पूरे मामले की जांच निगरानी को भी दे दिया जाए. निश्चित तौर पर ये मिट्टी घोटाला बीजेपी और सुशील मोदी के लिए न केवल वरदान साबित हुआ बल्कि सरकार की चाभी भी मिल गई. सुशील मोदी ने इसी मिट्टी घोटाले के बहाने लालू यादव एवं उनके परिवार के कई बेनामी संपत्ति को भी उजागर किया है.
VIDEO: घोटालों के आरोपों के बाद टूटा गठबंधन
मोदी उन दिनों प्रतिदिन लालू एंड फेमली के संपत्ति का एक एक कर खुलासा करते दिख रहे थे.
लेकिन जब से सरकार बदली और सुशील मोदी ने वन विभाग का कार्यभार सम्भाला तब विभाग के अधिकारियों के अनुसार उन्होंने कई ख़ामियां पकड़ी हैं. सबसे पहले जिस औचित्य के आधार पर मिट्टी ख़रीदी गई उसे बदला गया. जो मिट्टी के ख़रीद के लिए कोटेशन मंगाये गए वो सब एक दिन में 100-100 रुपए के अन्तर का है. इस मिट्टी से चिड़ियाघर के अंदर जिस सड़क का निर्माण कराया गया उसकी कोई ज़रूरत नहीं थी. वित्तीय नियमों का खुल्ल्म खुल्ला उल्लंघन किया गया.
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निश्चित रूप से राज्य सरकार अब उच्च न्यायालय में इन सभी बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट देगी. उम्मीद की जा रही है कि जमीन के इस पूरे मामले की जांच निगरानी को भी दे दिया जाए. निश्चित तौर पर ये मिट्टी घोटाला बीजेपी और सुशील मोदी के लिए न केवल वरदान साबित हुआ बल्कि सरकार की चाभी भी मिल गई. सुशील मोदी ने इसी मिट्टी घोटाले के बहाने लालू यादव एवं उनके परिवार के कई बेनामी संपत्ति को भी उजागर किया है.
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मोदी उन दिनों प्रतिदिन लालू एंड फेमली के संपत्ति का एक एक कर खुलासा करते दिख रहे थे.
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Tejpratap Yadav