- बिहार विधान परिषद की दस सीटों के चुनाव में NDA के पास वर्तमान विधानसभा में मजबूत बहुमत होने की वजह से बढ़त है.
- विधान परिषद की एक सीट जीतने के लिए लगभग 23 से 25 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है.
- JDU को सबसे ज्यादा सीटें मिलने की संभावना है जबकि BJP दो से तीन सीटों की दावेदार है.
Bihar Legislative Council Election: बिहार में विधान परिषद की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. NDA और महागठबंधन दोनों खेमों में टिकट के दावेदार सक्रिय हो गए हैं. लेकिन विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए सबसे ज्यादा बढ़त NDA के पास मानी जा रही है. यही वजह है कि इस चुनाव को केवल विधान परिषद की सीटों का चुनाव नहीं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक ताकत दिखाने के बड़े मंच के रूप में भी देखा जा रहा है.
विधान परिषद की एक सीट के लिए 23-25 विधायकों का चाहिए समर्थन
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में विधान परिषद की एक सीट जीतने के लिए करीब 23 से 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है. मौजूदा समय में NDA के पास मजबूत बहुमत है. ऐसे में NDA आराम से 8 से 9 सीटें जीत सकता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सहयोगी दलों के बीच पूरा तालमेल बना रहा तो NDA 10वीं सीट पर भी कब्जा जमा सकता है.
महागठबंधन की स्थिति कमजोर
दूसरी तरफ महागठबंधन की स्थिति इस चुनाव में कमजोर मानी जा रही है और उसके लिए एक या दो सीट बचाना भी चुनौती माना जा रहा है. सबसे ज्यादा चर्चा NDA के भीतर सीट बंटवारे को लेकर है. सूत्रों के मुताबिक JDU को सबसे ज्यादा सीटें मिल सकती हैं क्योंकि खाली हो रही सीटों में कई सीटें फिलहाल JDU के पास हैं.
BJP 2-3 सीटों की दावेदार, चिराग, उपेंद्र के साथ-साथ जीतन भी कर रहे दावा
- BJP भी 2 से 3 सीटों की दावेदार मानी जा रही है. इसके अलावा HAM, LJP और राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी हिस्सेदारी मांग रहे हैं. HAM प्रमुख जीतन राम मांझी खुलकर एक सीट की मांग कर चुके हैं. वहीं चिराग पासवान की पार्टी भी विधान परिषद में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है.
- उपेंद्र कुशवाहा भी अपनी पार्टी के लिए प्रतिनिधित्व चाहते हैं. NDA नेतृत्व विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी सहयोगी दल को नाराज नहीं करना चाहता, इसलिए सीट बंटवारे को लेकर काफी सावधानी बरती जा रही है.

मंत्री निशांत और दीपक प्रकाश का विधान परिषद जाना तय
संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी कई नाम चर्चा में हैं. सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को लेकर हो रही है. मंत्री बनने के बाद उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी है. ऐसे में माना उन्हें विधान परिषद भेजा जाना तय है. पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का नाम भी लगभग तय है.
जदयू, भाजपा की ओर से कौन-कौन दावेदार?
JDU की तरफ से गुलाम गौस, भीष्म साहनी, कुमुद वर्मा, भगवान सिंह कुशवाहा और संजय गांधी, संजय सिंह जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं. इनमें से कुछ मौजूदा MLC हैं और पार्टी उनके प्रदर्शन और राजनीतिक उपयोगिता के आधार पर फैसला कर सकती है. BJP की तरफ से संजय मयूख, देवेश कुमार, नवल किशोर यादव और राजेंद्र गुप्ता जैसे नामों की चर्चा हो रही है. पार्टी इस बार सामाजिक और जातीय संतुलन को ध्यान में रखकर उम्मीदवार तय करना चाहती है.
विधानपरिषद में भी समीकरणों का रखा जाएगा ध्यान
सूत्रों के मुताबिक NDA इस बार पूरी तरह रिपीट फॉर्मूला पर नहीं चलना चाहता. कुछ पुराने चेहरों की वापसी हो सकती है, लेकिन कई नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना भी मजबूत मानी जा रही है. खासकर अतिपिछड़ा दलित, महिला, कुशवाहा और सवर्ण समीकरण को ध्यान में रखकर उम्मीदवार तय किए जा सकते हैं. भाजपा गैर-यादव OBC और EBC वर्गों को मजबूत संदेश देना चाहती है, जबकि JDU अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को संतुलित रखने की कोशिश करेगी.

महागठबंधन की ओर से इन नामों की चर्चा
दूसरी तरफ महागठबंधन की स्थिति इस चुनाव में काफी मुश्किल दिखाई दे रही है. विधानसभा में संख्या कम होने की वजह से RJD और कांग्रेस के पास सीमित विकल्प हैं. माना जा रहा है कि महागठबंधन पूरी ताकत के साथ एक या दो सीटों पर ही फोकस करेगा. RJD की तरफ से मौजूदा MLC मो. फारूक, सुनील सिंह और कुछ मुस्लिम एवं यादव नेताओं के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं.
क्यों अहम माना जा रहा बिहार का विधान परिषद चुनाव?
राजनीतिक तौर पर यह चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसे आने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल भी कहा जा रहा है. NDA इस चुनाव के जरिए अपनी एकजुटता और मजबूत संख्या का संदेश देना चाहता है, जबकि विपक्ष अपनी राजनीतिक मौजूदगी बचाने की कोशिश करेगा. टिकट बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन में जातीय और सामाजिक संतुलन सबसे बड़ा फैक्टर माना जा रहा है.
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