- किशनगंज जिले के टेउसा पंचायत में पुल बनाया गया लेकिन वह नदी के बजाय खेत में बना है
- पुल के नीचे न तो कोई नदी बहती है और न ही नाला, बल्कि किसान वहां खेती कर रहे हैं
- ग्रामीणों ने इस पुल को बेकार बताते हुए कहा कि यह केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का उदाहरण है
'खाया-पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना'- यह मशहूर मुहावरा इन दिनों बिहार के किशनगंज जिले के इंजीनियरों पर सटीक बैठ रहा है. जहां एक ओर जनता पुल के लिए तरसती है, वहीं किशनगंज में इंजीनियरों ने अपनी 'अद्भुत' प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए नदी के बजाय सीधे खेत के बीच में ही पुल खड़ा कर दिया है.
हालत यह है कि इस पुल के नीचे न तो कोई नदी बहती है और न ही कोई नाला. यहां तो किसान मजे से खेती कर रहे हैं. इस अनोखे अजूबे को देखकर अब लोग कह रहे हैं कि शायद नासा वालों को भी इस 'इंजीनियरिंग मार्वल' को खोजने के लिए सैटेलाइट भेजनी पड़ेगी.

कहां का है ये मामला?
मामला किशनगंज जिले के टेउसा पंचायत का है. यहां के धूमबस्ती और ढेकसरा गांव के बीच रमजान नदी बहती है. ग्रामीणों की सुविधा के लिए लगभग 5 साल पहले मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लाखों रुपये खर्च करके पुल तो बना दिया लेकिन ये पुल नदी से काफी दूर एक किसान के खेत में बनकर तैयार हो गया. इस पुल के नीचे नदी या नाला बहता नजर आपको नहीं आएगा.किसान पुल के नीचे खेतीबाड़ी करते नजर आएंगे. पुल की तस्वीर को देखकर ऐसा लग रहा है कि इलाके के खेतों में धान-गेहूं मक्का की फसल के अलावा अब पुल की खेती भी होने लगी है.

ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीण इस परियोजना को लेकर सवाल उठा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल किसी काम का नहीं है और इसे बनाने के पीछे सिर्फ सरकारी धन को लूटने का उद्देश्य है. गांव वालों ने बताया कि जहां पर पुल बना है वहां पर कोई नदी या नाला नहीं बहता है. बल्कि नदी पुल से कुछ दूरी पर है जहां खाली है. लोगों ने कहा कि इस पुल का क्या काम है, जब पुल खेत पर हो तो लोग इसका इस्तेमाल कैसे करेंगे.
अधिकारियों का क्या है कहना?
इस बारे में जब किशनगंज के डीएम विशाल राज से पूछा गया तो उन्होंने जांच करने की बात कही. उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और इसकी जांच की जा रही है, जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी.
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