39 Harding Road Bungalow : बिहार की राजनीति में इन दिनों सरकारी बंगलों को लेकर माहौल काफी गरमाया हुआ है. पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को उनके 21 साल पुराने आशियाने, '10 सर्कुलर रोड' को खाली करने का सरकारी नोटिस मिला है, लेकिन उन्होंने इसे छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है.
वैसे सरकार ने उन्हें इसके बदले '39 हार्डिंग रोड' वाला बंगला अलॉट किया है, पर राबड़ी देवी वहां शिफ्ट होने को कतई तैयार नहीं हैं. दरअसल, इस नए बंगले का इतिहास ही कुछ ऐसा रहा है कि कोई भी नेता यहां कदम रखने से कतराता है. राजनीतिक गलियारों में इस बंगले को लेकर एक अजीब सा खौफ है और लोग इसे अपने राजनीतिक करियर के लिए 'अनलकी' या अपशगुनी मानने लगे हैं.
आख़िर क्यों 'अनलकी' माना जाता है 39 हार्डिंग रोड बंगला?
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के नए बंगले (39 हार्डिंग रोड) में न जाने की सबसे बड़ी वजह इसका पुराना और डरावना इतिहास है. बिहार के राजनीतिक गलियारों में इस बंगले को शुरू से ही 'अनलकी' और राजनीतिक करियर को खत्म करने वाला माना जाता रहा है. इस बंगले का इतिहास गवाह है कि जो भी मंत्री या दिग्गज नेता इस आवास में रहने आया, वह दोबारा कभी सूबे में मंत्री नहीं बन सका. इतना ही नहीं, इस बंगले में आने के बाद कई कद्दावर नेताओं का राजनीतिक ग्राफ ऐसा गिरा कि वे पूरी तरह हाशिए पर आ गए.
इस बंगले में रह चुके दिग्गजों का हश्र
- पूर्व मंत्री भूपेंद्र प्रसाद वर्मा – राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कद्दावर नेता और मंत्री रहते हुए यहां आए, फिर कभी राजनीति में उठ नहीं पाए.
- पूर्व मंत्री मदन मोहन झा – कांग्रेस के तत्कालीन मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में यहां निवास किया, दोबारा मंत्री पद नसीब नहीं हुआ.
- पूर्व मंत्री शमीम अहमद – तत्कालीन कानून मंत्री का आशियाना भी यही बंगला था, इसके बाद इनका ग्राफ गिर गया.
- पूर्व स्वास्थ्य मंत्री चंद्र मोहन राय – बीजेपी के सीनियर लीडर, इस बंगले में आने के बाद राजनीतिक रूप से नेपथ्य में चले गए.
- पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा – भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता, यहां रहने के बाद दोबारा चमक नहीं पाए.
- पूर्व मंत्री रामसूरत राय – बीजेपी के पूर्व भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री, इस आवास में रहने के बाद दोबारा कैबिनेट में जगह नहीं बना पाए.
वास्तु दोष, मजार और काले साये' का खौफ!
39 हार्डिंग रोड बंगले को लेकर स्थानीय लोगों और नेताओं के बीच कई तरह की धार्मिक और वास्तु से जुड़ी भ्रांतियां भी फैली हुई हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस बंगले पर किसी 'काले साये'' का असर है जिसकी वजह से ये जगह राजनेताओं के लिए शुभ नहीं मानी जाती.
इसके पीछे के मुख्य कारण यह माने जाते हैं
परिसर के अंदर पुरानी मजार: इस बंगले की बाउंड्री के अंदर ही एक बेहद प्राचीन मजार स्थित है.
हज भवन और मस्जिद की निकटता: यह सरकारी बंगला पटना के हज भवन के बिल्कुल पास स्थित है .
पीछे मस्जिद का होना: इस बंगले के ठीक पीछे एक बड़ी मस्जिद है
कयास लगाया जा रहा है कि इन्हीं आध्यात्मिक, वास्तु और राजनीतिक कारणों की वजह से लालू परिवार इस 'अनलकी' बंगले में कदम रखने से कतरा रहा है.
यह भी पढ़ें: पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को खाली करना होगा सरकारी आवास, जानिए लालू परिवार के पास कितने सरकारी बंगले हैं
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं