कहते हैं कि मौत और जिंदगी के बीच सिर्फ एक पल का फासला होता है, लेकिन विक्रमशिला सेतु पर यह फासला महज 37 सेकंड का था. भागलपुर में गंगा की उफनती लहरों के बीच एक मां अपने कलेजे के टुकड़े के साथ मौत को गले लगाने जा रही थी, तभी खाकी वर्दी में एक रक्षक ने 'देवदूत' बनकर उनकी जान बचा ली. विक्रमशिला सेतु की ऊंची रेलिंग पर एक महिला अपने नवजात शिशु को गोद में लिए खड़ी थी. उसकी आंखों में गहरा दर्द था और वह उफनती गंगा में कूदने ही वाली थी. उस समय वहां से गुजर रहे डायल 112 के दरोगा सिकंदर कुमार की नजर उस पर पड़ी. सिकंदर अपनी ड्यूटी के लिए निकले थे, लेकिन सामने दिख रही तबाही को देख उन्होंने अपनी गाड़ी तुरंत रोक दी.
बिहार के भागलपुर जिले में एक हृदयविदारक घटना होते-होते रह गई, जब एक पुलिसकर्मी ने अपनी सूझबूझ, साहस और मानवीय संवेदनशीलता से एक मां और उसके मासूम बच्चे की जिंदगी बचा ली.#Bihar #BiharPolice pic.twitter.com/BR9jQQnbyh
— NDTV India (@ndtvindia) February 3, 2026
सूझबूझ और जांबाजी का परिचय
दरोगा सिकंदर कुमार ने बिना वक्त गंवाए मोर्चा संभाला. उन्होंने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए. महिला को बातों में उलझाया और उसका ध्यान भटकाया. उसे ढांढस बंधाया ताकि वह घबराकर कूद न जाए. मौका मिलते ही अपनी फौलादी पकड़ से महिला और बच्चे को रेलिंग के सुरक्षित हिस्से की ओर खींच लिया. महज 37 सेकंड की इस फुर्ती ने न सिर्फ एक महिला की जान बचाई, बल्कि उस मासूम को भी नया जीवन दिया जिसकी सांसें अभी शुरू ही हुई थीं.
महिला ने यह खौफनाक कदम उठाने का फैसला क्यों किया, इसका खुलासा फिलहाल नहीं हो पाया है. लेकिन सोशल मीडिया और पूरे भागलपुर में दरोगा सिकंदर कुमार की बहादुरी की जमकर तारीफ हो रही है. लोग कह रहे हैं कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सिकंदर ने साबित कर दिया कि वर्दी का असली मकसद इंसानियत की रक्षा करना है.
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