बिहार में पिछले 5 साल में साढ़े 3 हजार मजदूरों की दुर्घटना में मौत हो गई. बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के आंकड़ों से यह सामने आया है. ध्यान रहे कि यह वे आंकड़े हैं जो दर्ज हो पाए. बिहार की बड़ी आबादी असंगठित क्षेत्र में काम करती है. इन मजदूरों के लिए बिहार सरकार की अलग-अलग योजनाएं हैं. बिहार शताब्दी असंगठित कार्यक्षेत्र कामगार एवं शिल्पकार सामाजिक सुरक्षा योजना भी उसका एक हिस्सा है. इसके तहत दुर्घटना में किसी मजदूर की मृत्यु होने पर सरकार परिजनों को 2 लाख रुपये देती है. 2024-25 में 1658 मजदूरों की जान हादसों में गई. 14 मजदूर पूर्णतः दिव्यांग हो गये और 37 आंशिक रूप से दिव्यांग हुए। 54 मजदूरों को लाइलाज बीमारी ने घेर लिया. सरकार की तरफ से इन मजदूरों को करीब 37 करोड़ रुपये की सहायता दी गई.
राज्य से बाहर करीब हजार मजदूरों ने गंवाई जान
सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि बिहार के बाहर काम कर रहे 992 मजदूरों ने पिछले 5 साल में अपनी जान गंवाई है. 2024-25 में 457 मजदूरों ने बिहार के बाहर किसी दुर्घटना की वजह से जान गंवाई. इन मजदूरों के लिए सरकार ने बिहार राज्य प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना चलाई है. इसके तहत पिछले साल ऐसे मजदूरों के परिजनों को 6 करोड़ 34 लाख रुपये सहायता दी गई थी. इन आंकड़ों से पता चलता है कि 2020-21 में 110, 2021-22 में 76, 2022-23 में 136, 2023-24 में 213 और 2024-25 में 457 प्रवासी मजदूरों ने दुर्घटना की वजह से जान गंवाई. यानी पिछले 5 साल में राज्य के बाहर प्रवासी मजदूरों के मौत के मामलों में 4 गुणा की बढ़ोतरी हुई.
निर्माण श्रमिकों के लिए बना बोर्ड फंड इस्तेमाल करने में नाकाम
बिल्डिंग और दूसरी कंस्ट्रक्शन इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों की बेहतरी के लिए बना कल्याण बोर्ड भी सही से काम नहीं कर रहा. साल दर साल इस बोर्ड से लाभ लेने वाले मजदूरों की संख्या भी घटती जा रही है. 2024-25 में बिहार में 5 लाख 8 हजार कंस्ट्रक्शन वर्कर रजिस्टर्ड हैं. इनमें से 1 लाख को ही इस बोर्ड से लाभ मिला है. बोर्ड अपने पास जमा 768 करोड़ रुपये की राशि में का 70% ही इस्तेमाल कर पाया. जबकि 2023-24 में बोर्ड ने इस राशि का करीब 90 फीसदी इस्तेमाल किया था.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं