बिहार के भोजपुर में बुजुर्ग महिला की अंतिम विदाई चर्चा का विषय बनी हुई है. शाहपुर क्षेत्र के दिलमपुर गांव में 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला की अंतिम यात्रा अनूठे अंदाज में निकाई गई. शवयात्रा के आगे ढोल-नगाड़ों, डीजे और नाच-गाने के बीच दादी को विदाई दी गई. इस दौरान लोग झूमते-नाचते नजर आए. इसे जिसने भी देखा, वो देखता ही रह गया. इस अनोखी शवयात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. कुछ लोग इसे सकारात्मक सोच और जीवन के सम्मान के रूप में देख रहे हैं. जबकि कुछ इसे परंपराओं से अलग और गलत कदम बता रहे हैं.
शवयात्रा या बारात, लोग भी हैरान!
वहीं, परिजनों का कहना है कि बुजुर्ग महिला ने 95 साल की लंबी और संतुष्ट जिंदगी जी थी. उन्होंने परिवार और समाज के प्रति अपनी सभी जिम्मेदारियां पूरी की. ऐसे में उनकी विदाई को शोक नहीं, बल्कि 'जीवन के उत्सव' के रूप में मनाने का सोचा. परिवार ने इसे 'विजय यात्रा' का नाम दिया. जब शवयात्रा निकली, तो आसपास के क्षेत्रों से भी भीड़ उमड़ पड़ी. सड़क के दोनों ओर खड़े लोग इस दृश्य को देखते ही हैरान रह गए. बैंड-बाजे के साथ झूमते-नाचते लोगों को देखकर ऐसा लग रहा था मानो कोई बारात निकल रही हो.

शवयात्रा को लेकर गांव में अलग-अलग राय सामने आ रही है.
स्थानीय लोगों ने आपत्ति भी जताई
स्थानीय लोगों का मानना है, "बदलते समय के साथ समाज की सोच भी बदल रही है. अब लोग जीवन के हर पहलू को अपने तरीके से व्यक्त करना चाहते हैं, चाहे वह खुशी हो या दुख. अंतिम संस्कार केवल व्यक्ति की विदाई नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच संतुलन को समझने का एक आध्यात्मिक अवसर भी है. ऐसे में अत्यधिक भव्यता इस भावना को कमजोर कर सकती है."
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