भरतभूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में परिजनों ने न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं, बल्कि मामले की जांच कर रहे सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी की भूमिका पर भी संदेह व्यक्त किया है. परिवार का कहना है कि अब उन्हें रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में हो रही जांच से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रह गई है. उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच किसी कार्यरत (सिटिंग) न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर कोई सवाल न उठे. वहीं भोजपुर एसपी श्री राज को भी हटाने की मांग की गई है. क्योंकि परिजनों का आरोप है कि भरत के भाई चंदन को एसपी श्री राज ने धमकी देते हुए उनके न्याय की लड़ाई को ड्रामा बताया और बंद करने को कहा.
परिजनों के अनुसार, गुरुवार की देर रात भोजपुर के पुलिस अधीक्षक राज अपने दल-बल के साथ भरतभूषण तिवारी के पैतृक गांव पहुंचे. उन्होंने मृतक के परिजनों से मुलाकात कर पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय दिलाने का भरोसा दिया. परिवार के सदस्यों का कहना है कि एसपी की बातों के बाद कुछ समय के लिए उन्हें लगा कि प्रशासन उनकी पीड़ा को समझ रहा है और न्याय की दिशा में गंभीरता से प्रयास कर रहा है. लेकिन परिवार का आरोप है कि इसी मुलाकात के दौरान एक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने उनके मन में फिर से संदेह पैदा कर दिया.
भरतभूषण तिवारी के छोटे भाई चंदन तिवारी का दावा है कि पुलिस अधीक्षक ने उन्हें अलग ले जाकर कुछ ऐसी बातें कहीं, जिनसे उन्हें यह महसूस हुआ कि निष्पक्ष जांच की उम्मीद कमजोर पड़ रही है.
चंदन तिवारी ने बताया SP ने उससे क्या कहा
चंदन तिवारी ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि एसपी श्री राज ने उनसे कहा कि "तुम्हारा भाई अपराधी था, इसलिए यह सब हुआ. यह सारा ड्रामा बंद कर दो, नहीं तो दिक्कत हो जाएगी." चंदन का कहना है कि इन कथित टिप्पणियों ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया. क्योंकि भोजपुर, एसपी का लहजा पूरी तरह से सख्त था और उसे धमकी दी गई बुआई रही थी. उनका आरोप है कि जब जांच पूरी भी नहीं हुई है, तब इस प्रकार की टिप्पणी करना निष्पक्ष जांच की भावना के विपरीत है.
चंदन तिवारी ने आगे दावा किया कि उन्होंने एसपी की मौजूदगी में ही यह पूरी बात मामले की जांच कर रहे सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी विनोद कुमार सिन्हा को बताई. उनके अनुसार, उन्होंने उम्मीद की थी कि जांच अधिकारी इस मामले का तत्काल संज्ञान लेंगे और आवश्यक कार्रवाई करेंगे. हालांकि उनका कहना है कि उन्हें केवल लिखित आवेदन देने की सलाह दी गई.
कार्यरत न्यायधीश के देखरेख में जांच से विश्वास बढ़ेगा
परिवार का कहना है कि इस प्रतिक्रिया के बाद उनके मन में जांच प्रक्रिया को लेकर और अधिक संदेह उत्पन्न हो गया. उनका आरोप है कि यदि जांच अधिकारी के सामने ही इस प्रकार की शिकायत रखी गई और उस पर तत्काल कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. इसी कारण अब परिवार ने अपनी मांग बदलते हुए कहा है कि मामले की जांच किसी रिटायर्ड जज के बजाय किसी सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए. उनका कहना है कि कार्यरत न्यायाधीश की देखरेख में जांच होने से जनता का विश्वास भी बढ़ेगा और सभी पक्षों को निष्पक्ष न्याय मिलने की संभावना अधिक होगी.
फिलहाल परिजन प्रशासन से यह मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की जांच ऐसे न्यायिक तंत्र के माध्यम से कराई जाए, जिस पर किसी भी पक्ष को संदेह न हो. उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपने बेटे के लिए न्याय प्राप्त करना है और वे चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच हो.
हालांकि, इस संबंध में भोजपुर पुलिस अधीक्षक, से बात करने पर उन्होंने कोई भी उत्तर नहीं दिया. अब तक पुलिस विभाग अथवा जांच कर रहे सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है. इसलिए चंदन तिवारी द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती. प्रशासन और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
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