मंत्री अशोक चौधरी ने भरत भूषण तिवारी के माता-पिता से करीब 1 घंटे तक बातचीत की. इसके बाद मंत्री अशोक चौधरी ने मीडिया से कहा कि पूरे घटनाक्रम में कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब अभी तक स्पष्ट नहीं हैं. उन्होंने विशेष रूप से जगदीशपुर के SDM संजीत कुमार की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार यह प्रश्न उठ रहा है कि पुलिस मुठभेड़ जैसे अभियान में उनकी भूमिका क्या थी? और वे वहां किस हैसियत से मौजूद थे. मंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, जिससे हर तथ्य सामने आ सके और किसी भी निर्दोष के साथ अन्याय न हो.
"14 करोड़ रुपये की जांच कराएंगे"
मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, "भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने 14 सौ करोड़ की बात कही है. आशा देवी ने बताया कि जवनिया कटाओ को लेकर सरकार ने 14 सौ करोड़ पास किया था, जो जवनिया कटाओं में पीड़ित परिवारों को स्थापित करने के लिए था. एसडीएम पर गबन करने का आरोप लगाई हैं. हलांकि, 14 सौ करोड़ी जानकारी हमें नहीं है, पता करके इसकी जांच कराएंगे."
"भरत भूषण को न्याय जरूर मिलेगा"
मंत्री ने कहा, "भरत भूषण तिवारी को न्याय अवश्य मिलेगा. अगर न्याय नहीं मिलना होता तो इसकी जांच आईजी से भी कराई जा सकती थी. डीजी से भी कराई जा सकती थी, मगर रिटायर्ड जज से जांच करवाने का यही तात्पर्य है कि भरत भूषण तिवारी को न्याय मिल सके."
"निष्पक्ष जांच का मतलब सच्चाई तक पहुंचना"
अशोक चौधरी ने बातचीत के दौरान बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक अभयानंद के बयान का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि अभयानंद जैसे अनुभवी पुलिस अधिकारी ने भी सार्वजनिक रूप से SDM की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. मंत्री ने कहा कि जब पुलिस प्रशासन के शीर्ष पद पर रह चुके अधिकारी भी इस प्रकार के प्रश्न उठा रहे हैं तो इन पहलुओं को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच का उद्देश्य किसी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सच्चाई तक पहुंचना होना चाहिए.
नकली पिस्टल वाले बयान से नई बहस
अशोक चौधरी ने भरत भूषण तिवारी के हाथ में मौजूद कथित हथियार पर टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जब भरत भूषण ने फायरिंग ही नहीं की, तो क्या पता असली था या नकली. अगर असली होता तो फायरिंग तो होता जरूर.
मंत्री अशोक चौधरी के गंभीर बयानों के बावजूद रविवार देर शाम तक जिला प्रशासन या जगदीशपुर एसडीएम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी. ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इन आरोपों और सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है.
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