- जनसुराज को पिछले साल 24 जून को स्कूल का बस्ता चुनाव चिन्ह मिला था.
- लेकिन बांकीपुर उपचुनाव में पार्टी का चुनाव चिन्ह यही रहेगा यह तय नहीं है.
- ऐसे में पार्टी ने चुनाव चिन्ह के बदले नेता प्रशांत किशोर के चेहरे पर फोकस बढ़ा दिया है.
जनसुराज ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया. पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशांत किशोर के नाम का ऐलान किया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीले रंग वाले बैकड्रॉप पर एक घेरे में प्रशांत किशोर की तस्वीर, एक घेरे में गांधी और अम्बेडकर की तस्वीर है और एक बॉक्स में "जन सुराज" लिखा है. लेकिन पूरे बैकड्राप में कहीं भी पार्टी का चुनाव चिन्ह नहीं दिखता है. जबकि 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान जब पार्टी के उम्मीदवारों की सूची जारी हुई थी, तब इसी तरह का बैकड्रॉप था. बस गोल घेरे में प्रशांत किशोर की तस्वीर की जगह स्कूली बस्ता शामिल था. यानी तब प्रशांत किशोर के चेहरे की जगह पार्टी का चुनाव चिन्ह दिखाया जा रहा था.
लेकिन अब पार्टी ने अपनी रणनीति बदल दी है. आखिर यह बदलाव क्यों हुआ? जानने के लिए हमने पार्टी के नेताओं, चुनावी राजनीति के जानकारों से बातचीत की.

जन सुराज की यह तस्वीर अभी हाल की है. पीछे लगे बैनर पर आप देख सकते हैं कि कहीं चुनावी चिह्न नहीं नजर आ रहा.
Photo Credit: सोशल मीडिया
स्कूल का बस्ता अब जनसुराज का निशान नहीं
जनसुराज को पिछले साल 24 जून को स्कूल का बस्ता चुनाव निशान मिला था. हालांकि इस आदेश में यह स्पष्ट था कि यह निशान विधानसभा चुनाव तक के लिए ही है. इसके बाद निशान का उपयोग नहीं किया जा सकता. चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी को सिर्फ 3.34% वोट मिले. पार्टी को राज्य स्तरीय दल के रूप में रूप में भी मान्यता नहीं मिली. अगर उन्हें मान्यता मिलती तो पार्टी के लिए चुनाव चिन्ह रिजर्व होता. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.
इसीलिए पार्टी ने अपने प्रचार अभियान में स्कूल का बस्ता शामिल नहीं किया है. हालांकि रिटर्निंग ऑफिसर के पास अब भी यह सिंबल देने का विकल्प होगा. लेकिन अगर किसी अन्य उम्मीदवार ने भी यह निशान मांग दिया तो प्रशांत किशोर को यह निशान मिलने में मुश्किल हो सकती है.

जन सुराज नेताओं की यह तस्वीर 2025 बिहार विधानसभा चुनाव के समय की है, तब पोस्टर पर चुनाव चिन्ह स्कूल का बस्ता दिखता था.
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पार्टी को स्कूल का बस्ता मिलने की उम्मीद
चुनाव प्रभारी और पार्टी के वरिष्ठ नेता रामबली चंद्रवंशी ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, 'हम अभी मान्यता प्राप्त दल नहीं हैं. इसलिए हमारा निर्धारित चुनाव चिन्ह नहीं है. इसलिए हम अभी चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. नामांकन के दौरान हम स्कूल का बस्ता विकल्प के रूप में चुनेंगे. हमें उम्मीद है कि यह चुनाव चिन्ह हमें मिल जाएगा.
चुनाव चिन्ह नहीं प्रशांत किशोर का चेहरा घर, घर पहुंचाएगी जनसुराज
पार्टी ने चुनाव चिन्ह की कमी से निपटने का दूसरा रास्ता अपनाया है. पार्टी अब बांकीपुर विधानसभा के 90 हजार घरों में प्रशांत किशोर की फोटो वाला स्टीकर लगा रही है. क्योंकि अब EVM पर उम्मीदवार की फोटो भी होती है, इसलिए जनसुराज चुनाव चिन्ह के बजाय प्रशांत किशोर की तस्वीर घर - घर पहुंचाने पर फोकस कर रही है.
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय चुनाव निशान को अहम मानते हैं. वे कहते हैं, 'पिछली बार बांकीपुर में जन सुराज तीसरे नंबर पर रहा था. पार्टी को 7 हजार वोट भी आए थे. लेकिन मतदाताओं के एक बड़े वर्ग के पास चुनाव चिन्ह पहुंच गया था. अगर इस बार भी वही चुनाव चिन्ह मिलता है तो पार्टी के लिए आसानी होगी. क्योंकि लोगों को वह निशान याद है.'
बांकीपुर सीट पर हो रहे उपचुनाव में राजद ने भी अपना उम्मीदवार उतार दिया है. भाजपा ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है लेकिन उससे पहले चुनाव चिन्ह को लोगों तक पहुंचाना प्रशांत किशोर के लिए बड़ी चुनौती बना है.
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