प्रतीकात्मक तस्वीर
बेंगलुरु:
कन्नड़ भाषा के 24 घंटे के न्यूज़ चैनल जनश्री के सीईओ लक्ष्मी प्रसाद वाजपेयी सहित 6 आरोपियों को बेंगलुरु पुलिस ने एक व्यापारी को ब्लैकमेल करने और उससे मोटी रकम वसूलने के आरोप में गिरफ्तार किया है. इनमे से चैनल के सीईओ लक्ष्मी प्रसाद वाजपेयी को 19 मई तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है जबकि बाकी 5 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. पुलिस के मुताबिक लक्ष्मी प्रसाद वाजपेयी एक व्यापारी को लगातार धमका रहे थे कि या तो वो 10 करोड़ रुपये उसे दे या फिर उसे और उसकी कंपनी को बदनाम कर दिया जाएगा. इस 10 करोड़ रुपये की पहली किश्त पुलिस की हिदायत के मुताबिक जैसे ही इस व्यापारी ने वाजपेयी के सहयोगी मिथुन को दी, पुलिस ने मिथुन और वाजपेयी दोनों को धर दबोचा.
पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त हेमंत निम्बालकर ने बताया कि वाजपयी ने इसी तरह बेंगलुरु के कमर्शियल स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दर्ज एक दूसरे मामले में भी 10 करोड़ रुपये की रकम ब्लैकमेल कर एक व्यापारी से वसूली गई थी. पुलिस का दावा है कि वाजपेयी अपने चैनल में टारगेट की छोटी सी स्टोरी टेलीकास्ट करते जिसका मकसद व्यापारी और उसके प्रतिष्ठान की छवि को धूमिल करना होता. व्यापारी डर जाते कि कही बाजार में उनकी साख न गिर जाए और फिर ऐसे लोगों से वाजपेयी मनमानी रकम वसूलते.
वाजपेयी और उसके सहयोगी मिथुन के साथ इनके चार सशस्त्र सुरक्षाकर्मी भी गिरफ्तार किए गए हैं जो कि मूलरूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. पुलिस का कहना है कि ये लोग अपने पिस्टल से व्यापारियों को डराते थे. ऐसे में एआरएम एक्ट के तहत अलग से मामला दर्ज कर इस बात की भी जांच की जा रही है कि इनके पास हथियारों का लाइसेंस था या नहीं और जिस लाइसेंस की ये बात कर रहे हैं वो वैध भी है या नहीं.
पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त हेमंत निम्बालकर ने बताया कि वाजपयी ने इसी तरह बेंगलुरु के कमर्शियल स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दर्ज एक दूसरे मामले में भी 10 करोड़ रुपये की रकम ब्लैकमेल कर एक व्यापारी से वसूली गई थी. पुलिस का दावा है कि वाजपेयी अपने चैनल में टारगेट की छोटी सी स्टोरी टेलीकास्ट करते जिसका मकसद व्यापारी और उसके प्रतिष्ठान की छवि को धूमिल करना होता. व्यापारी डर जाते कि कही बाजार में उनकी साख न गिर जाए और फिर ऐसे लोगों से वाजपेयी मनमानी रकम वसूलते.
वाजपेयी और उसके सहयोगी मिथुन के साथ इनके चार सशस्त्र सुरक्षाकर्मी भी गिरफ्तार किए गए हैं जो कि मूलरूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. पुलिस का कहना है कि ये लोग अपने पिस्टल से व्यापारियों को डराते थे. ऐसे में एआरएम एक्ट के तहत अलग से मामला दर्ज कर इस बात की भी जांच की जा रही है कि इनके पास हथियारों का लाइसेंस था या नहीं और जिस लाइसेंस की ये बात कर रहे हैं वो वैध भी है या नहीं.
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