अगर आप अक्सर रात के समय नेशनल हाईवे पर सफर करते हैं, तो आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी. कुछ जगहों पर तो चमचमाती लाइट्स लगी होती हैं, लेकिन कई किलोमीटर लंबे स्ट्रेच ऐसे भी होते हैं जहां घाना अंधेरा होता है. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में गुस्सा आता है कि सरकार हमसे इतना टोल टैक्स लेती है, फिर भी पूरे हाईवे पर लाइट क्यों नहीं लगाती? क्या वाकई पूरे नेशनल हाईवे पर लाइट लगाना कानूनी रूप से जरूरी है? इस बड़े सवाल और भ्रम पर खुद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने चुप्पी तोड़ी है और इसके पीछे का एक ऐसा सच बताया है जो आपको हैरान कर देगा.
NHAI ने दूर किया सबसे बड़ा भ्रम
भारत में लगातार शानदार और चमचमाते एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे का जाल बिछाया जा रहा है. इसी बीच सोशल मीडिया और आम जनता के बीच अक्सर यह सवाल उठता रहता है कि हाईवे के लंबे रास्तों पर लगातार लाइटें क्यों नहीं जलतीं. लोगों को लगता है कि पूरे हाईवे को रोशन रखना सरकार की जिम्मेदारी है. इस गलतफहमी को दूर करने के लिए NHAI ने खुद सामने आकर सफाई दी है. NHAI ने साफ कहा है कि पूरे नेशनल हाईवे पर लगातार लाइटिंग देना न तो अनिवार्य है और न ही व्यावहारिक है.
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क्या कहते हैं सरकारी नियम?
हाईवे पर लाइट लगाने के नियम ऐसे ही मर्जी से तय नहीं होते. इसके लिए बकायदा कानून और गाइडलाइंस बनी हुई हैं. भारत में सड़कों के डिजाइन और इंफ्रास्ट्रक्चर के मानक तय करने वाली संस्था 'इंडियन रोड्स कांग्रेस' (IRC) के तकनीकी दिशा-निर्देशों के आधार पर ही लाइटिंग की व्यवस्था की जाती है. इन नियमों के मुताबिक, रोशनी सिर्फ उन्हीं जगहों पर दी जाती है जहां वाहनों की सुरक्षा के लिए और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रोशनी होना बेहद जरूरी यानी क्रिटिकल होता है.
आखिर किन जगहों पर लगती हैं लाइट्स?
NHAI ने उन खास जगहों की लिस्ट भी शेयर की है जहां नियम के मुताबिक लाइट लगाना जरूरी होता है. इन हाई-रिस्क या हाई-एक्टिविटी जोन में शामिल हैं: जैसे सभी टोल प्लाजा और उनके आस-पास का इलाका, इंटरचेंज, चौराहे और प्रमुख जंक्शन, सभी फ्लाईओवर्स और अंडरपास, आबादी वाले क्षेत्र या सेमी-अर्बन इलाके जहां पैदल चलने वाले लोग हों, बस बेज और ट्रकों के रुकने वाले ले-बाई और दुर्घटना संभावित क्षेत्र और भारी ट्रैफिक वाले हिस्से आदि.
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पूरे हाईवे को रोशन न करने की असली वजह
अब सवाल आता है कि सरकार बाकी के खाली और लंबे रास्तों पर लाइट क्यों नहीं लगाती? इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं - आर्थिक और पर्यावरणीय. अगर हजारों किलोमीटर लंबे हाईवे नेटवर्क पर लगातार स्ट्रीट लाइट्स लगाई जाएं, तो बिजली की खपत और कार्बन फुटप्रिंट बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा. इसके अलावा, इन लाइट्स की देखरेख और मेंटेनेंस का खर्च इतना भारी होगा कि वह आर्थिक रूप से बिल्कुल भी समझदारी भरा फैसला नहीं होगा.
बिना लाइट के कैसे सुरक्षित रहता है सफर?
NHAI का कहना है कि बिना लाइट वाले हिस्सों में भी रात के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. नए जमाने के हाईवे पर रिफ्लेक्टिव साइनेज (चमकने वाले बोर्ड), रोड मार्किंग्स (सड़क पर बनी चमकदार पट्टियां) और एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स दिए जाते हैं. ये फीचर्स आपकी गाड़ी की हेडलाइट की रोशनी पड़ते ही चमक उठते हैं और ड्राइवर को रास्ता दिखाने में मदद करते हैं. इसलिए, रात में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए पूरे हाईवे पर लाइट का होना जरूरी नहीं, बल्कि गाड़ी की हेडलाइट और रोड रिफ्लेक्टर्स ही काफी होते हैं.
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