दुनिया की सबसे बड़ी लग्जरी कार कंपनियों में से एक Mercedes-Benz को अमेरिका में एक बड़े खतरे का सामना करना पड़ सकता है. अमेरिकी सांसद एक ऐसे नए कानून पर विचार कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य उन वाहन निर्माताओं पर रोक लगाना है जिनके कारोबारी या स्वामित्व संबंध ऐसे देशों से जुड़े हैं जिन्हें अमेरिका अपने 'विदेशी विरोधी' मानता है. यदि यह प्रस्तावित कानून लागू हो जाता है, तो इसका सीधा असर Mercedes-Benz जैसी कंपनियों पर पड़ सकता है, जिनमें चीनी निवेशकों की हिस्सेदारी मौजूद है.
यह कदम सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल ऑटोमोबाइल उद्योग में बड़े बदलाव ला सकता है. खासकर उन कंपनियों के लिए जो अलग-अलग देशों के निवेशकों और साझेदारों के साथ कारोबार कर रही हैं.

आखिर क्यों निशाने पर आ सकती है Mercedes-Benz?
Mercedes-Benz जर्मनी की एक प्रसिद्ध ऑटोमोबाइल कंपनी है, लेकिन इसके स्वामित्व ढांचे में चीनी निवेशकों की भी हिस्सेदारी है. अमेरिका में प्रस्तावित नए नियमों के अनुसार, यदि किसी वाहन निर्माता का संबंध ऐसे देशों से पाया जाता है जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है, तो उसके कारोबार पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
यही वजह है कि Mercedes-Benz का नाम इस बहस में सामने आया है. कंपनी की आंशिक हिस्सेदारी चीन से जुड़े निवेशकों के पास होने के कारण यह संभावित कानून उसके लिए चुनौती बन सकता है.
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अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता तनाव
पिछले कुछ सालों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है. दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा तेज हुई है और इसका असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी दिखाई देने लगा है.
Mercedes-Benz के कारोबार पर क्या होगा असर?
अगर प्रस्तावित कानून लागू हो जाता है और उसमें Mercedes-Benz जैसी कंपनियां शामिल होती हैं, तो कंपनी के लिए अमेरिकी बाजार में कारोबार करना मुश्किल हो सकता है. अमेरिका दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार माना जाता है और किसी भी बड़े वाहन निर्माता के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है.
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