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0 से 100 स्पीड सिर्फ 3 सेकंड में! दुनिया को हैरान करने वाली इस कार का असली राज है ये अनोखा फ्यूल

आमतौर पर फ्लेक्स-फ्यूल (E85) को लोग सस्ता और माइलेज देने वाला ईंधन मानते हैं, लेकिन कोनिगसेग सीसीएक्सआर (Koenigsegg CCXR) ने इसी ईंधन से 1,018bhp की पावर और 402kmph की टॉप स्पीड हासिल की थी. जानिए पूरी कहानी.

0 से 100 स्पीड सिर्फ 3 सेकंड में! दुनिया को हैरान करने वाली इस कार का असली राज है ये अनोखा फ्यूल
भारत में जिसे गरीब का ईंधन समझा, उससे विदेशी कंपनी ने बना दी 402 kmph की रफ्तार वाली सुपरकार

आजकल भारत में जब भी फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) या इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (E85) की बात होती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला ख्याल आता है - सस्ता ईंधन, कम खर्च और पर्यावरण की सुरक्षा. सरकार भी इसे आम जनता के लिए पेट्रोल का एक किफायती विकल्प मानकर प्रमोट कर रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी इथेनॉल वाले ईंधन का इस्तेमाल दुनिया की सबसे तेज और महंगी गाड़ियां बनाने वाली स्वीडिश कंपनी कोनिगसेग (Koenigsegg) ने पैसे बचाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी कार को एक उड़ने वाला रॉकेट बनाने के लिए किया था? 

साल 2007 में आई कोनिगसेग सीसीएक्सआर (Koenigsegg CCXR) ने दुनिया को दिखा दिया था कि फ्लेक्स-फ्यूल सिर्फ माइलेज के लिए नहीं, बल्कि सुपरकार की परफॉर्मेंस को आसमान पर पहुंचाने के काम भी आ सकता है.

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कोनिगसेग सीसीएक्सआर के होश उड़ाने वाले आंकड़े

कोनिगसेग सीसीएक्सआर एक ऐसी हाइपरकार थी जिसके आंकड़े किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी थे. इस कार के दिल में 4.7-लीटर का ट्विन-सुपरचार्ज्ड V8 इंजन लगा था. जब इस गाड़ी में नॉर्मल पेट्रोल की जगह E85 फ्लेक्स-फ्यूल डाला गया, तो इसने 1,018 हॉर्सपावर (bhp) की अविश्वसनीय ताकत और 1,060Nm का भारी-भरकम टॉर्क पैदा किया. इस हाइपरकार की टॉप स्पीड 402 किलोमीटर प्रति घंटा थी और यह मात्र 3.1 सेकंड में 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ लेती थी. अपने जमाने में यह दुनिया की सबसे पावरफुल प्रोडक्शन कारों में से एक थी.

इथेनॉल से कैसे मिली इतनी तेज रफ्तार?

अब सवाल यह उठता है कि आखिर कोनिगसेग ने E85 ईंधन से इतनी ज्यादा पावर कैसे निकाली? दरअसल, इथेनॉल का ऑक्टेन नंबर प्रीमियम पेट्रोल से कहीं ज्यादा होता है. इसके साथ ही इथेनॉल जब इंजन के कंबशन चैंबर के अंदर जाता है, तो यह इंजन को बहुत तेजी से ठंडा करता है. इस कूलिंग इफेक्ट की वजह से इंजन के अंदर विस्फोट या 'नॉक' होने का खतरा खत्म हो जाता है. कोनिगसेग ने इसी का फायदा उठाया और इंजन की ट्यूनिंग को बहुत तेज कर दिया, जिससे नॉर्मल मॉडल के मुकाबले इसकी पावर में 26 प्रतिशत का बड़ा इजाफा हो गया.

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इस सस्ते ईंधन को पचाने और उससे सुपरकार जैसी पावर निकालने के लिए कंपनी ने कार के फ्यूल सिस्टम में बड़े बदलाव किए थे. इसमें बड़े साइज के फ्यूल इंजेक्टर्स, मजबूत फ्यूल लाइन्स और नए पिस्टन रिंग्स लगाए गए थे. साथ ही ट्विन सुपरचार्जर्स के बूस्ट प्रेशर को काफी बढ़ा दिया गया था. कार के अंदर एक खास 'फ्लेक्स-फ्यूल सेंसर' भी लगाया गया था, जो यह खुद पहचान लेता था कि कार में प्रीमियम पेट्रोल भरा है या E85 इथेनॉल, या फिर दोनों का मिक्सचर. कार दोनों ही ईंधनों पर बिना रुके आराम से दौड़ सकती थी.

दुनिया में क्यों नहीं छा सका E85 ईंधन?

इस शानदार कामयाबी के बाद भी E85 फ्यूल पूरी दुनिया का नंबर वन फ्यूल नहीं बन सका. आज भी मार्केट में E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिक्स) जैसे ईंधन ज्यादा चलते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि दुनिया भर में करोड़ों गाड़ियां ऐसी हैं जो बहुत ज्यादा इथेनॉल नहीं झेल सकतीं.

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E85, E20
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