देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तेजी से तैयार किया जा रहा है. अब इलेक्ट्रिक कार लेकर लंबी दूरी की यात्रा करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है. कई हाईवे और शहरों में आपको चार्जिंग स्टेशन मिल जाएंगे और ज्यादातर चार्जिंग कंपनियों के ऐप पर इनकी लोकेशन और उपलब्धता भी दिखाई देती है. लेकिन असली परेशानी तब सामने आती है, जब आप अपनी कार लेकर इन चार्जिंग स्टेशनों तक पहुंचते हैं.
कागज और ऐप पर चार्जर उपलब्ध होने के बावजूद कई जगहों पर चार्जर ऑफलाइन, फॉल्ट में या फिर उनकी चार्जिंग गन काम नहीं करती. ऐसे में सवाल सिर्फ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की संख्या का नहीं, बल्कि उसके मेंटेनेंस और ऑपरेशनल अवेलेबिलिटी का भी है.
मुझे इसका अनुभव हाल ही में तब हुआ, जब मैं MG ZS EV लेकर गुजरात के भुज से दिल्ली तक करीब 1,200 किलोमीटर की यात्रा पर निकला. इस सफर ने मुझे एक बात जरूर समझा दी कि आज इलेक्ट्रिक कार से हजारों किलोमीटर की यात्रा करना संभव है, लेकिन इसके लिए सिर्फ कार की रेंज पर भरोसा करना काफी नहीं है. आपको अपना पूरा सफर पहले से प्लान करना पड़ता है और रास्ते में मौजूद चार्जर्स की स्थिति को भी ध्यान में रखना पड़ता है.
भुज से जोधपुर तक सबसे बड़ी चुनौती
मैंने MG ZS EV से भुज से जोधपुर, फिर जोधपुर से जयपुर और उसके बाद जयपुर से दिल्ली का सफर पूरा किया. इस दौरान कार ने करीब 380 किलोमीटर की रियल-वर्ल्ड रेंज दी. भुज से जोधपुर के बीच मुझे सबसे ज्यादा Hindustan Petroleum (HP) के चार्जर देखने को मिले. खास बात यह थी कि इन चार्जर्स की लोकेशन मुझे MG e-Hub ऐप के जरिए मिली.
शुरुआत में यह देखकर काफी अच्छा लगा कि हर 40-50 किलोमीटर के आसपास चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध दिखाई दे रहे हैं. यानी ऐसा लग रहा था कि अब EV लेकर लंबी दूरी की यात्रा करने में चार्जिंग को लेकर ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ेगी. लेकिन जब मैंने इन चार्जर्स का इस्तेमाल करना शुरू किया तो तस्वीर थोड़ी अलग नजर आई. मेरे अनुभव में करीब 10 चार्जर्स में से 6 या तो ऑफलाइन थे, या उनकी चार्जिंग गन काम नहीं कर रही थी, या किसी तरह का फॉल्ट दिखाई दे रहा था.
यही वह स्थिति थी जिसने इस सफर के दौरान मेरी सबसे ज्यादा परेशानी बढ़ाई. चार्जिंग स्टेशन मौजूद है, ऐप पर भी दिखाई दे रहा है, लेकिन वहां पहुंचने के बाद पता चलता है कि वह काम ही नहीं कर रहा. ऐसे में आपको अगले चार्जर तक पहुंचने के लिए फिर से रास्ता और बैटरी की गणना करनी पड़ती है. इससे न सिर्फ समय खराब होता है, बल्कि रेंज एंग्जायटी भी बढ़ जाती है.
पेट्रोल पंप पर चार्जर, लेकिन जानकारी नहीं
एक और समस्या जो मैंने इस दौरान महसूस की, वह थी चार्जिंग स्टेशन के ऑपरेशन को लेकर स्थानीय स्टाफ की जानकारी. जब मैंने कुछ HP पेट्रोल पंप के कर्मचारियों से चार्जर के बारे में पूछा तो कई जगह उन्हें खुद चार्जर की स्थिति की जानकारी नहीं थी. यहां तक कि उन्हें चार्जर को ऑपरेट करने की प्रक्रिया के बारे में भी ज्यादा जानकारी नहीं थी.
ऐसी स्थिति में अगर कोई EV मालिक पहली बार लंबी दूरी की यात्रा कर रहा हो तो उसकी परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है. इसके अलावा कुछ चार्जिंग स्टेशनों के कस्टमर केयर नंबर पर समय पर रिस्पॉन्स नहीं मिला. मेरे अनुभव में Indian Oil e-Charger और HP eCharge के मामले में भी ऐसी समस्या देखने को मिली. यहां एक बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी हाईवे पर चार्जर लगाया गया है, तो सिर्फ उसे इंस्टॉल कर देना पर्याप्त है या उसकी 24x7 ऑपरेशनल उपलब्धता और नियमित मेंटेनेंस भी उतना ही जरूरी है?
जोधपुर में बदली तस्वीर
हालांकि जोधपुर पहुंचने के बाद चार्जिंग का अनुभव काफी बेहतर रहा. यहां Tata Power, Statiq और Jio-bp जैसे नेटवर्क के चार्जर्स ने मेरे सफर को काफी आसान बनाया. इन जगहों पर मुझे करीब 50-80 kW तक के फास्ट चार्जर्स मिले और वे अच्छी तरह काम कर रहे थे. जोधपुर से जयपुर के बीच भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छा दिखाई दिया. रास्ते में कई चार्जिंग विकल्प मौजूद थे. हालांकि इस हिस्से में MG ZS EV की रेंज ने भी मेरा साथ दिया और कार एक ही चार्ज में जोधपुर से जयपुर पहुंच गई, इसलिए बीच रास्ते चार्जिंग की जरूरत नहीं पड़ी.
जयपुर से दिल्ली तक ज्यादा परेशानी नहीं
जयपुर से दिल्ली के सफर में भी मुझे चार्जिंग को लेकर किसी बड़ी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा. हालांकि मुंबई एक्सप्रेसवे पर मौजूद एक Indian Oil e-Charger में फॉल्ट देखने को मिला. वहीं Tata Power के फास्ट चार्जर्स काम करते हुए मिले और उन्होंने सफर को आसान बनाया.
EV का भविष्य सिर्फ ज्यादा चार्जर्स में नहीं
इस करीब 1,200 किलोमीटर की यात्रा के बाद मेरा अनुभव यही कहता है कि भारत में EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर निश्चित तौर पर तेजी से बढ़ रहा है. अब इलेक्ट्रिक कार लेकर लंबी दूरी की यात्रा करना कोई असंभव काम नहीं है. लेकिन सिर्फ चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाना काफी नहीं होगा. एक चार्जर तभी उपयोगी है, जब वह जरूरत के समय काम भी करे.
EV यूजर्स के लिए चार्जिंग स्टेशन की लोकेशन जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है उसका ऑनलाइन दिखना, सही तरीके से काम करना, चार्जिंग गन का उपलब्ध होना, स्थानीय स्टाफ का प्रशिक्षित होना और जरूरत पड़ने पर कस्टमर सपोर्ट मिलना. मेरे इस सफर ने मुझे यह जरूर सिखाया कि EV से लंबी दूरी की यात्रा अब की जा सकती है, लेकिन फिलहाल इसे "चार्ज करो और निकल जाओ" वाली यात्रा बनाने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ उसके मेंटेनेंस और ऑपरेशनल क्वालिटी पर भी उतना ही ध्यान देना होगा. आखिरकार, EV यूजर को सिर्फ यह भरोसा नहीं चाहिए कि चार्जर 50 किलोमीटर बाद है, बल्कि यह भरोसा चाहिए कि वह चार्जर वहां पहुंचने पर काम भी कर रहा होगा.
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