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This Article is From Apr 05, 2017

गुजरात संवेदनशील राज्य लेकिन लंबे समय से इंचार्ज डीजीपी से चल रहा पुलिस का काम

गुजरात संवेदनशील राज्य लेकिन लंबे समय से इंचार्ज डीजीपी से चल रहा पुलिस का काम
प्रतीकात्मक फोटो.
अहमदाबाद: गुजरात सीमावर्ती राज्य है और साथ ही आतंकवाद के लिहाज़ से संवेदनशील राज्य भी है, लेकिन फिर भी गुजरात में पिछले लंबे समय से इंचार्ज डीजीपी से ही काम चल रहा है. पीपी पांडे सुप्रीम कोर्ट में केस की वजह से बिदाई तक इंचार्ज डीजीपी बने रहे. उनके बाद गीता जौहरी भी इंचार्ज के तौर पर ही आई हैं. इस मामले में विवादित मुद्दों पर कोई बोलना नहीं चाहता.

पहले डीजीपी पीसी ठाकुर थे. किसी वजह से एक साल पहले उनका कार्यकाल कई महीनों का बाकी होने के बावजूद उनका तबादला कर दिया और डेपुटेशन पर भेज दिया गया. उस वक्त वरिष्ठ पुलिस अफसरों में पीपी पांडे सबसे सीनियर थे. सूत्रों की मानें तो पांडे को सरकार डीजीपी बनाना चाहती थी, लेकिन इशरत जहां मामला उनके सामने चल रहा था. इस मामले में किरकिरी न हो इसलिए उन्हें इंचार्ज डीजीपी बनाया गया था.

अब वजह यह दी जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट का पिछले साल अक्टूबर में एक निर्देश सामने आया है कि अगर पूर्णकालीन डीजीपी बनाया जाए तो उसका कार्यकाल कम से कम दो साल तक रखना होगा. गीता जौहरी इसी साल नवम्बर में रिटायर हो रही हैं.

वजह जो भी हो लेकिन मुखिया न होने से पुलिस के कार्य पर असर तो पड़ता ही है और इंचार्ज से कभी भी चार्ज लिया जा सकता है. पुलिस विभाग में सुगबुगाहट यही है कि डीजीपी की नियुक्ति राज्य में राजनैतिक कारणों से टलती रही है. लेकिन आतंकवाद के साथ-साथ सामाजिक आंदोलनों से भी जूझ रहे राज्य को पूर्णकालीन डीजीपी की जरूरत है.
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