Jootamar Holi Kya Hai: ढोल की आवाज दूर से आती है, हवा में रंग का हल्का सा धुंआ तैर रहा होता है. अचानक भीड़ में शोर उठता है और एक भैंसा गाड़ी नजर आती है. उस पर बैठा होता है लॉट साहब...गले में जूतों की माला, सिर पर हेलमेट. लोग जयकारे भी लगाते हैं और जूते भी बरसाते हैं. यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि एक ऐसी परंपरा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है. आखिर क्या है इस जूतेमार होली का राज?
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300 साल पुरानी परंपरा (300 Year Old Tradition)
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में Holi 2026, Jootamar Holi, Lat Sahab Julus जैसे कीवर्ड हर साल ट्रेंड करते हैं. यहां होली पर एक शख्स को अंग्रेज अफसर की तरह सजाकर भैंसा गाड़ी पर बिठाया जाता है. उसे लॉट साहब कहा जाता है. गले में जूतों की माला पहनाई जाती है और जुलूस के दौरान लोग उस पर जूते चप्पल बरसाते हैं. बताया जाता है कि यह परंपरा करीब 300 साल पुरानी है. अंग्रेजी हुकूमत के जुल्म के खिलाफ लोगों का गुस्सा इसी जुलूस के जरिए जताया जाता है. लॉट साहब को हेलमेट पहनाया जाता है ताकि चोट न लगे, लेकिन झाड़ू और जूतों की बौछार लगातार चलती रहती है.

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कहां से निकलता है जुलूस (Procession Route and Timing)
ये जुलूस चौक क्षेत्र के फूलमती मंदिर से शुरू होकर कोतवाली तक जाता है. वहां प्रतीकात्मक सलामी दी जाती है. इसके बाद शहर के अलग-अलग रास्तों से गुजरते हुए घंटा घर तक पहुंचता है. शहर में दो जगहों से यह जुलूस निकलता है, जिससे माहौल और भी गरमजोशी भरा हो जाता है.

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सुरक्षा के सख्त इंतजाम (Heavy Security Arrangements)
पिछले साल विवाद के बाद इस बार प्रशासन ज्यादा सतर्क है. करीब 30 इंस्पेक्टर, 150 उपनिरीक्षक, 600 हेड कांस्टेबल और दो कंपनी PAC तैनात की जा रही है. ड्रोन से निगरानी होगी और रूट पर बैरिकेडिंग की गई है. धार्मिक स्थलों को ढकने और शांति बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन ने कई बैठकों के बाद तैयारी पूरी की है. यह परंपरा अनोखी जरूर है, लेकिन इसके साथ कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द भी जुड़ा है. जूतेमार होली केवल एक तमाशा नहीं, बल्कि इतिहास से जुड़ा प्रतीक है.
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