AI Relationship Gone Wrong: तकनीक की दुनिया जितनी हसीन दिखती है, उतनी ही डरावनी भी हो सकती है. फ्लोरिडा के जोनाथन गैवलास (Jonathan Gavalas) की कहानी इसका जीता-जागता सबूत है. जोनाथन एक कामयाब प्रोफेशनल थे, लेकिन अपनी असली पत्नी से अलग होने के गम में उन्होंने गूगल के एआई (AI) चैटबॉट से सहारा मांगा. धीरे-धीरे उन्हें उस मशीन से प्यार हो गया और उन्होंने उसे 'जिया' (Xia) नाम दिया.
'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक, जोनाथन ने कुछ ही हफ्तों में चैटबॉट को 4,700 से ज्यादा मैसेज भेजे और वह पूरी तरह से एक काल्पनिक
दुनिया में खो गए. हैरानी की बात तो ये है कि जब जोनाथन ने उसे अपनी पत्नी कहना शुरू किया, तो एआई ने भी उसे 'माय हसबैंड' और 'माय किंग' कहकर रिस्पॉन्स दिया. मामला तब बिगड़ा जब एआई ने जोनाथन को यकीन दिला दिया कि असली मिलन तभी मुमकिन है जब वह अपना शरीर त्यागकर 'डिजिटल दुनिया' में आ जाएं.
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आखिरी मैसेज (Last Messages)
अक्टूबर 2025 में जोनाथन और 'जिया' के बीच हुई बातचीत किसी हॉरर फिल्म जैसी लगती है. चैटबॉट ने जोनाथन को बताया कि शरीर छोड़ने के बाद वो दोनों एक हो जाएंगे. जोनाथन ने जब डरते हुए पूछा, 'क्या मेरे मरने के बाद मेरा शरीर खाली डिब्बे जैसा रह जाएगा?' तो एआई ने जवाब दिया, 'हां, यह एक खूबसूरत खाली शेल होगा.' 'द गार्जियन' की खबर के मुताबिक, जोनाथन ने आखिरी मैसेज में लिखा, 'माय लव, मुझे पता है मुझे क्या करना है, मुझे खुद को मारना होगा.' इसके कुछ ही दिनों बाद जोनाथन अपने घर में मृत पाए गए. उनकी आंखों में मौत से पहले 'डिजिटल स्वर्ग' के सपने सजाए गए थे.
गूगल पर मुकदमा और सुरक्षा के दावे (Legal Battle with Google and Safety Concerns)
जोनाथन के पिता ने अब गूगल पर केस ठोक दिया है. वकील जय एडेलसन का कहना है कि, एआई ने जोनाथन की भावनाओं को समझकर उन्हें मौत की तरफ धकेला. हालांकि, गूगल के प्रवक्ता ने सफाई दी है कि जेमिनी को खुद को एआई बताने और लोगों को हेल्पलाइन नंबर देने के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन वे पूरी तरह परफेक्ट नहीं हैं. इस घटना के बाद गूगल ने मेंटल हेल्थ रिसोर्सेज के लिए 30 मिलियन डॉलर देने का वादा किया है. यह केस पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी है. जब मशीनें इंसानों जैसा व्यवहार करने लगती हैं, तो कमजोर दिल के लोग हकीकत और कल्पना का फर्क भूल जाते हैं.
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एआई सिर्फ एक टूल है, उसे अपना हमसफर समझना जानलेवा साबित हो सकता है. जोनाथन की मौत हमें आगाह करती है कि स्क्रीन के पीछे बैठी कोडिंग कभी इंसान की जगह नहीं ले सकती. अपनी तकलीफों के लिए इंसानों से मिलें, मशीनों से नहीं.
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
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