Zara Hatke News: नौकरी की तलाश में महीनों से भटक रहे एक टेक प्रोफेशनल के साथ इंटरनेट पर कुछ ऐसा हुआ, जिसने 'टॉक्सिक वर्क कल्चर' पर एक नई बहस छेड़ दी है. जब आप बेरोजगार होते हैं, तो किसी विदेशी कंपनी के फाउंडर या CEO का तुरंत रिप्लाई आना किसी बड़े मौके जैसा लगता है. लेकिन, इस शख्स के लिए यह रिप्लाई किसी बुरे सपने से कम नहीं था. वायरल हो रहे एक पोस्ट में साफ दिख रहा है कि कैसे कंपनियां मजबूरी का फायदा उठाकर कर्मचारियों से इंसान नहीं, बल्कि मशीनों जैसा बर्ताव करने की उम्मीद कर रही हैं.
अमेरिकी CEO को किया था डायरेक्ट मैसेज
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर अपनी आपबीती शेयर करते हुए एक टेक इंजीनियर ने बताया कि वह पिछले कई महीनों से बेरोजगार है. हताश होकर उसने जॉब के लिए अमेरिका के एक स्टार्टअप फाउंडर को डायरेक्ट मैसेज (Cold DM) किया. हैरानी की बात यह रही कि उस अमेरिकी CEO ने बिना समय गंवाए लगभग तुरंत जवाब दिया और उसे काम पर रखने में दिलचस्पी भी दिखाई. लेकिन, जब इस कैंडिडेट ने पूछा कि उसे रोज क्या काम करना होगा, तो CEO का जवाब सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई.
Is this thing getting super normalized in India ? (a US CEO messaged me this btw)
by u/Holiday-Ad-5883 in developersIndia
हैरान कर देंगी CEO के नौकरी देने की शर्तें
अमेरिकी CEO ने अपने मैसेज में साफ-साफ शब्दों में ऐसी शर्तें रखीं जो किसी का भी मानसिक सुकून छीन लें. उसने लिखा, 'हमें ऐसे इंजीनियर्स की तलाश है, जो अपना वर्क-लाइफ बैलेंस पूरी तरह कुर्बान करने को तैयार हों. तुम्हें इंफ्रास्ट्रक्चर की बहुत अच्छी समझ होनी चाहिए. साथ ही, कोड लिखने और नया सीखने में तुम्हें बेहतरीन होना होगा. सबसे बड़ी बात, तुम्हारे अंदर बिल्कुल भी अहंकार नहीं होना चाहिए, क्योंकि तुम्हें लगभग हर दिन यह सुनना पड़ेगा कि तुम बेवकूफ हो और तुम्हें अभी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है.'
सोशल मीडिया पर भड़के लोग, CEO को लताड़ा
इस अजीबोगरीब डिमांड वाले पोस्ट के वायरल होते ही इंटरनेट पर हंगामा मच गया. लोगों ने कमेंट सेक्शन में इस कंपनी और CEO की जमकर क्लास लगाई. अलग-अलग यूजर्स ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं दीं.
- यूजर Common-Brush-7027 ने तीखा तंज कसते हुए सलाह दी, 'उसे बताओ कि अगर मैनेजमेंट गलत फैसले लेगा, तो तुम भी उन्हें बेवकूफ कहोगे. यह साफ तौर पर एक टॉक्सिक जगह है.'
- वहीं, CodeCraftedCxo नाम के यूजर ने चुटकी लेते हुए कहा, 'इस मैसेज से ही साफ हो गया है कि उसने तुम्हें तुरंत जवाब क्यों दिया. इस रवैये के साथ वह किसी को काम पर रख ही नहीं सकता.'
क्या ये कोई भारतीय CEO है? एक बहुत ही दिलचस्प कमेंट Valuable-Still-3187 का था. उसने शक जताते हुए लिखा, 'यह 100% कोई भारतीय CEO ही होगा. जब लोग विदेशों में बैठे भारतीय मैनेजरों के बर्ताव की आलोचना करते हैं, तो कई लोग बुरा मान जाते हैं. लेकिन सच यही है कि अगर उन्हें पता चल जाए कि आप जरूरतमंद हैं, तो वे आपका जमकर शोषण करेंगे. मेरे भाई ने यूके में पढ़ाई के दौरान ऐसे हर पार्ट-टाइम जॉब से दूरी बनाई, जिसका मालिक कोई भारतीय था.'
कुछ यूजर्स समर्थन करते भी नजर आए
हालांकि, हर कोई इसके खिलाफ नहीं था. Technical-Shop-9907 ने इसे दूसरे नजरिए से देखते हुए लिखा, 'वह तुम्हें बहुत ज्यादा घंटों तक काम करने के लिए तैयार कर रहा है. लेकिन अगर तुम युवा हो और काम अच्छा है, तो यह बुरी बात नहीं है. तुम वहां बहुत कुछ सीखोगे.'
खराब 'वर्क कल्चर' से हर साल 8.4 लाख मौतेंअमेरिकी सीईओ के इस कड़वे जवाब के बीच, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की 'द साइकोसोशल वर्किंग एनवायरनमेंट' रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि दफ्तरों का ऐसा माहौल अब जानलेवा बन चुका है. काम के अत्यधिक बोझ, खराब माहौल और मानसिक शोषण के कारण दुनिया भर में हर साल 8,40,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है. इसके अलावा, इस तनाव की वजह से लोग हर साल स्वस्थ जीवन के लगभग 4.5 करोड़ साल (DALYs) अपंगता या बीमारी में गंवा देते हैं. इस खराब वर्क कल्चर का असर सिर्फ सेहत पर नहीं, बल्कि आर्थिक आंकड़ों पर भी पड़ रहा है. काम के इस मानसिक तनाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल अपनी कुल जीडीपी का 1.37 प्रतिशत का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
(अस्वीकरण: यह कहानी रेडिट पर वायरल हुई एक पोस्ट और उसके बाद मिली सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं पर आधारित है. एनडीटीवी ने पोस्ट में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं