अगर हम आपसे कहें कि आपको एक कॉम्पटिशन में भाग लेना है, तो आप तुरंत उसके बारे में जानकारियां निकाल कर तैयारी करने में जुट जाएंगे. लेकिन अगर हम आपसे कहें कि इस प्रतियोगिता में आपको कुछ नहीं करना तो...
हो सकता है आपको इस बात पर यकीन न हो, लेकिन यह सच है. साउथ कोरिया में हर साल ‘स्पेस आउट’ नाम की प्रतियोगिता होती है, जिसमें प्रतियोगी को 90 मिनट तक कुछ नहीं करना होता. हो सकता है कि यह प्रतियोगिता सुनने में बहुत अजीब और आसान सी लगे. लेकिन आज की जनरेशन के लिए यह आसान साबित नहीं होगी. क्योंकि इसमें है एक छोटा सा ट्विस्ट. मानों न मानों जी हां, आपको 90 मिनट तक कुछ नहीं करना, मतलब कुछ नहीं करना. इस दौरान आप किसी भी इलेक्ट्रोनिक डिवाइस का इस्तेमाल भी नहीं कर सकते, न ही खा सकते, न सो सकते हैं, न हंस सकते हैं और न ही किसी से बात कर सकते हैं. क्या आप इस बात को सोच सकते हैं 90 मिनट बिना अपने फोन के...
यह प्रतियोगिता साल 2014 से शुरू की गई. इस शुरू करने वाले वहां के एक लोकल आर्टिस्ट थे, जो लोगों को फोन की लत से छुटकारा दिलाना चाहते थे.
अब जरा देखिए कि प्रतियोगिता के दौरान लोगों की हालत कैसी होती है-
यहां विजेता किस तरह चुने जाते होंगे. यकीनन यह सवाल आपके जहन में जरूर आया होगा. तो इस खेल में विजेता चुनने के लिए हर प्रतिभागी की हार्ट रेट हर 15 मिनट में चैक की जाती हैं. जिस व्यक्ति की हार्ट रेट सबसे ज्यादा स्थिर रही हों उसी को विजेता घोषित किया जाता है.
आखिर विजेता को जीतने पर मिलता क्या है... तो इस प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रतिभागी को मिलता है खूब सारा सुकून और मन की शांति.
हो सकता है आपको इस बात पर यकीन न हो, लेकिन यह सच है. साउथ कोरिया में हर साल ‘स्पेस आउट’ नाम की प्रतियोगिता होती है, जिसमें प्रतियोगी को 90 मिनट तक कुछ नहीं करना होता. हो सकता है कि यह प्रतियोगिता सुनने में बहुत अजीब और आसान सी लगे. लेकिन आज की जनरेशन के लिए यह आसान साबित नहीं होगी. क्योंकि इसमें है एक छोटा सा ट्विस्ट. मानों न मानों जी हां, आपको 90 मिनट तक कुछ नहीं करना, मतलब कुछ नहीं करना. इस दौरान आप किसी भी इलेक्ट्रोनिक डिवाइस का इस्तेमाल भी नहीं कर सकते, न ही खा सकते, न सो सकते हैं, न हंस सकते हैं और न ही किसी से बात कर सकते हैं. क्या आप इस बात को सोच सकते हैं 90 मिनट बिना अपने फोन के...
यह प्रतियोगिता साल 2014 से शुरू की गई. इस शुरू करने वाले वहां के एक लोकल आर्टिस्ट थे, जो लोगों को फोन की लत से छुटकारा दिलाना चाहते थे.
अब जरा देखिए कि प्रतियोगिता के दौरान लोगों की हालत कैसी होती है-
यहां विजेता किस तरह चुने जाते होंगे. यकीनन यह सवाल आपके जहन में जरूर आया होगा. तो इस खेल में विजेता चुनने के लिए हर प्रतिभागी की हार्ट रेट हर 15 मिनट में चैक की जाती हैं. जिस व्यक्ति की हार्ट रेट सबसे ज्यादा स्थिर रही हों उसी को विजेता घोषित किया जाता है.
आखिर विजेता को जीतने पर मिलता क्या है... तो इस प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रतिभागी को मिलता है खूब सारा सुकून और मन की शांति.
लेखक के बारे में
अनिता शर्मा
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