Jurassic Period Fossils: थाईलैंड की धरती के नीचे से एक ऐसा राज बाहर आया है, जिसने वैज्ञानिकों के भी होश उड़ा दिए हैं. दरअसल, कालासिन में खुदाई के दौरान शोधकर्ताओं को एक विशालकाय डायनासोर के जीवाश्म मिले हैं. 15 करोड़ साल पुराने एक नए डायनासोर की प्रजाति की खोज ने पेलियोन्टोलॉजी की दुनिया में खलबली मचा दी है. इस नए डायनासोर की प्रजाति का नाम उरागासॉरस कालासिनेसिस (Uragasaurus kalasinensis) रखा गया है, जो अपनी लंबी गर्दन और अनोखी शारीरिक बनावट के लिए चर्चा में है.
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इतनी अनोखी बनावट, वैज्ञानिक भी दंग (Unique features of Uragasaurus)
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, थाईलैंड में डायनासोर की एक नई प्रजाति का पता चला है जो लाखों साल पहले रहती थी. जीवाश्मों से मिली जानकारी ने वैज्ञानिकों को पौधों को खाने वाले एक ऐसे डायनासोर के बारे में और जानने में मदद की है, जिसकी गर्दन बहुत लंबी थी और जिसमें ऐसी अनोखी खूबियां थीं, जो पहले कभी किसी दूसरे डायनासोर में नहीं देखी गई थीं. माना जाता है कि पौधों को खाने वाला यह डायनासोर लगभग 15 करोड़ साल पहले रहता था. इसकी गर्दन बेहद लंबी थी और इसकी लंबाई 20 मीटर तक थी, जो लगभग एक क्रिकेट पिच की लंबाई के बराबर है. सीटी स्केन में हड्डियों के बीच बहुत ही अलग अनोखी वाई-शेप वाली बनावट देखी गई है, जिसे पहले कभी नहीं देखा गया.

जुरासिक काल का नया रहस्य (Mystery of the Jurassic Era)
महासाराखम यूनिवर्सिटी (Mahasarakham University) के डॉ. अपीरूत निलपानापन (Dr. Apirut Nilpanapan) और उनकी टीम ने इस पर लंबा शोध किया है. खुदाई के दौरान मिली हड्डियों को जब सीटी स्कैन के जरिए परखा गया, तो पता चला कि यह मैमेनचीसॉरिडे (Mamenchisauridae) परिवार का सदस्य है. इसके अवशेष चीन में मिले थे, लेकिन थाईलैंड में खुदाई में मिली यह खोज अपनी तरह की पहली खोज है. इन प्रजाति की सबसे बड़ी खासियत इनकी बेहद लंबी गर्दन थी. डॉ. अपीरूत निलपानापन को जब इस नई प्रजाति का पता चला तो उनकी खुशी सातवें आसमान पर थी. उन्होंने बताया कि, वह इतने ज्यादा एक्साइटेड थे कि उन्होंने अपना कंप्यूटर ही तोड़ दिया था. सर्वे टीम को उस इलाके के अच्छी तरह जांच की तो उन्हें वहां से हड्डियों के अलावा डायनासोर के दांत समेत कई और अवशेष मिले.

दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ता दायरा (Expansion of discoveries in Southeast Asia)
खोज वाली जगह, 'फू नोई' (Phu Noi) में लेट जुरासिक काल के कई तरह के जीवाश्म मिले. यहां मिले जीवाश्मों में से 90 प्रतिशत से ज्यादा डायनासोर के अवशेष थे. यही नहीं वैज्ञानिकों को स्कैन से बहुत कुछ खास विशेषताएं भी मिली हैं. जैसे- इन डायनासोर में 'लैमिना' (laminae) कही जाने वाली सहायक हड्डियों का Y-आकार का ढांचा शामिल है. डॉ. अपीरूत निलपानापन के मुताबिक, इस डायनासोर के हवा की गुहा (air-cavity) वाला अनोखा ढांचा इसे दुनिया के अन्य डायनासोरों से अलग बनाता है. यही वजह है कि, ये खास है. यह स्टडी 'नेचर' (Nature) साइंटिफिक जर्नल में प्रकाशित हुई थी.
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