नई दिल्ली:
कपिल सिब्बल कह चुके हैं कि रामलीला ग्राउंट के बारे में फैसला पार्टी और सरकार दोनों के स्तर पर लिया गया था। सोमवार को जिस तरह से पार्टी ने रामदेव पर हमला बोला है और उससे पहले सरकार ने जो कार्रवाई की थी सिब्बल की बातें सही लगती हैं। लेकिन एनडीटीवी की नीता शर्मा की रिपोर्ट बताती है कि सरकार के मंत्री एक जून को एयरपोर्ट पर रामदेव का सिर्फ स्वागत करने नहीं गए थे बल्कि तैयारी पूरी थी कि अगर रामदेव अड़ गए तो वहीं हिरासत में ले लिए जाएं। एयरपोर्ट पर प्रणब मुखर्जी, कपिल सिब्बल, सुबोधकांत सहाय और पवन बंसल को बातचीत के लिए भेजने का फैसला सीसीपीए यानी संसदीय मामलों की कैबिनेट कमेटी में लिया गया और शनिवार रात की कार्रवाई का फैसला उसी शाम सरकार ने हाई लेवल पर तब लिया जब बाबा तीन बार अपनी बात से पलट चुके थे। पहला मौका तब आया जब एयरपोर्ट पर मौजूद अधिकारियों के पास बाबा को हिरासत में लेने का आदेश तब भी थालेकिन बात बनती लगी तो शांत रहे। दूसरा मौका तब आया जब क्लैरिजेज होटल में बातचीत के वक्त भी अफसरों के पास हिरासत मे लेने के आदेश थे लेकिन बाबा की चिट्ठी ने उन्हें बचा लिया। जिसमें उन्होंने समझौते का वादा किया था। तीसरा मौका तब, जब बाबा रामदेव ने सरकार से एक दिन का अनशन और तीन दिनों के तप की इजाज़त मांगी थी इस शर्त पर कि वो शुक्रवार को शाम चार बजे समझौते का ऐलान कर देंगे। लेकिन जब बाबा पलटे तो शाम पांच बचे हुई बैठक में कार्रवाई का फैसला हो गया।