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बहन की जान बचाने के लिए पकड़ा था पहला सांप, आज 10000 रेस्क्यू कर नेपाल का 'स्नेकमैन' बन गया ये शख्स

Sagar Pandey Snake Catcher: सागर पांडे कहते हैं मेरा फोन बजने का अमूमन मतलब यही होता है कि किसी ने सांप देखा है और उसके रेस्कयू के लिए मेरी मदद की जरूरत है.

बहन की जान बचाने के लिए पकड़ा था पहला सांप, आज 10000 रेस्क्यू कर नेपाल का 'स्नेकमैन' बन गया ये शख्स
18 साल में 10 हजार रेस्क्यू कर नेपाल के 'स्नेकमैन' बने सागर पांडे.
Sagar Pandey

Nepal News: नेपाल के पाल्पा जिले में रहने वाले 31 साल के सागर पांडे को लोग अब 'स्नेक मैन' के नाम से पहचानने लगे हैं, क्योंकि पिछले 18 सालों में उन्होंने 10 हजार से ज्यादा सांपों का रेस्क्यू किया है. उनके नाम 107 किंग कोबरा बचाने का रिकॉर्ड भी दर्ज है. आज स्थिति ऐसी है कि पश्चिमी नेपाल में किसी के घर में सांप निकले या खुद वन विभाग को रेस्क्यू करना हो, तो मदद के लिए सबसे पहला कॉल सागर को ही किया जाता है.

'मैंने कोई ट्रेनिंग नहीं की'

खास बात यह है कि सागर को सांप पकड़ने की कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं मिली है. बावजूद इसके वो अब तक 40 अलग-अलग प्रजातियों के सांप पकड़ चुके हैं. उनके सबसे खतरनाक ऑपरेशन्स में 12 किलो का किंग कोबरा और 48 किलो का भारी-भरकम अजगर शामिल है. सागर बताते हैं कि वे अक्सर जहरीले सांपों को नंगे हाथों से ही काबू कर लेते हैं. 

कैसे शुरू किया ये काम?

सागर बताते हैं कि सांपों के प्रति उनका यह लगाव बचपन में शुरू हुआ था, जब उन्होंने अपनी नवजात चचेरी बहन को बचाने के लिए घर में घुसे एक सांप को मारने की बजाय पहली बार सुरक्षित पकड़ा था. धीरे-धीरे खेतों में दिखने वाले सांपों को सुरक्षित पकड़ना उनका शौक बन गया और तजुर्बे के साथ वे इस काम में एक्सपर्ट हो गए. अब आसपास के जिलों से भी उनके पास सांप पकड़ने के लिए फोन आते रहते हैं.

'ये मेरी कमाई का जरिया नहीं'

हालांकि, ग्रेजुएशन कर चुके सागर इस काम को बिजनेस की तरह नहीं करते. वे कहते हैं कि आम सांपों को पकड़ने की उनकी कोई फिक्स फीस नहीं है. लोग अपनी मर्जी से खुशी-खुशी जो दे देते हैं, वे रख लेते हैं. हालांकि दूर जाकर किंग कोबरा का रेस्क्यू करने पर वे दूरी के हिसाब से वे तय चार्ज लेते हैं.

'डंडे लेकर पीछे पड़ जाते हैं लोग'

द काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सागर बताते हैं कि सांपों से ज्यादा उन्हें इंसानों से निराशा होती है. वे कहते हैं, 'लोग मुझे सांप पकड़ने के लिए बुलाते तो हैं, लेकिन रेस्क्यू के बाद उनका बर्ताव बदल जाता है. नियम के मुताबिक सांप को रेस्क्यू करके उसी के प्राकृतिक माहौल में छोड़ा जाना चाहिए, लेकिन लोग डंडे लेकर मेरे पीछे पड़ जाते हैं. उन्हें डर लगता है कि मैं सांप को उनके घर के आस-पास ही छोड़ दूंगा। लोगों की यह सोच दुख पहुंचाती है.'

'सांस को देखते ही मारे नहीं'

'स्नेक मैन' का कहना है कि लोगों को सांप दिखने पर उसे उसके हाल पर छोड़ देना चाहिए, क्योंकि कोई भी सांप सिर्फ इंसान को देखकर कभी हमला नहीं करता. जब तक आप उसे उकसाएंगे नहीं, छेड़ेंगे नहीं या उसे खतरा महसूस नहीं होगा, तब तक वह नहीं काटेगा. सांप का डसना सिर्फ अपनी जान बचाने का एक तरीका है. इसलिए, उन्हें मारें नहीं, बल्कि रेस्क्यू टीम को बुलाएं.

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