Bihar News: आमतौर पर नालंदा के डीएम ऑफिस में फाइलों की आवाजाही और सरकारी बैठकों का शोर होता है. लेकिन इस बार माहौल बिल्कुल अलग था. हाथों में गुलाब, आंखों में बड़े सपने और चेहरे पर मासूमियत लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (बिहारशरीफ) की छात्राएं शनिवार को जब डीएम ऑफिस पहुंचीं, तो वहां का पूरा माहौल ही बदल गया. मौका था 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत एक एजुकेशनल टूर का, जो इन बच्चियों के लिए एक ऐसा दिन बन गया जिसे वे शायद ही कभी भूल पाएं.
जब बच्ची ने पूछा- 'मैडम, आप IAS कैसे बनीं?'
नालंदा की डीएम उदिता सिंह ने इन बच्चियों से किसी सख्त अफसर की तरह नहीं, बल्कि एक दोस्त और गाइड की तरह बात की. बातचीत के दौरान जब एक बच्ची ने बड़ी ही मासूमियत से पूछ लिया कि, मैडम! आप आईएएस कैसे बनीं? तो डीएम साहिबा ने भी पूरी ईमानदारी से अपनी संघर्ष की कहानी उनके सामने रख दी.

दफ्तर में मिलने आई बच्ची ने डीएम मैडम से पूछ लिया कि वे आईएएस कैसे बनीं.
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'इंजीनियर बनने का सपना छोड़कर IAS बनी'
उन्होंने बताया, 'मेरा पहला सपना इंजीनियर बनने का था. आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की. इस दौरान कई बार ऐसा लगा कि मेरे साथी मुझसे आगे निकल गए हैं. लेकिन मैंने धैर्य नहीं छोड़ा, लगातार मेहनत की और आखिरकार मेरा आईएएस बनने का सपना सच हो गया.'
डीएम साहिबा के दिए 3 शानदार मंत्र

डीएम उदिता सिंह ने बच्चियों को दिए 3 सक्सेस मंत्र.
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बच्चियों का हौसला बढ़ाते हुए डीएम उदिता सिंह ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के कुछ ऐसे मंत्र दिए, जो सीधे उनके दिलों में उतर गए. उन्होंने बच्चियों को समझाया कि संघर्ष कभी बोझ नहीं होता. यह हमें अंदर से मजबूत बनाता है. सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, इसलिए कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनका डटकर सामना करना चाहिए.
निडर बनने की सीख देते हुए डीएम ने कहा कि अपनी बात खुलकर रखना सीखें. जब तक आप अपनी परेशानी बताएंगी नहीं, किसी को पता कैसे चलेगा? उन्होंने छात्राओं को सशक्त बनने के लिए महिला हेल्पलाइन नंबर 181 और इमरजेंसी सेवा 112 के बारे में भी जागरूक किया.
बच्चियों ने की मांग, डीएम ने तुरंत दिया आदेश
इस खुले माहौल में बच्चियों ने भी बिना डरे अपनी बात रखी. उन्होंने स्कूल में सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी एंड वेलनेस, डांस और म्यूजिक की रेगुलर क्लासेज शुरू करवाने की मांग की. डीएम ने बच्चियों की इस मांग पर तुरंत एक्शन लिया और संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द ये वोकेशनल ट्रेनिंग शुरू करवाने के निर्देश दे दिए, ताकि बेटियां न सिर्फ पढ़ाई में बल्कि हुनर में भी आत्मनिर्भर बन सकें.
सिर्फ टूर नहीं, आसमान छूने की उड़ान

कंट्रोल रूम का दौरा करते हुए छात्राओं की तस्वीर.
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डीएम से इस शानदार मुलाकात के बाद बच्चियों ने पुलिस कंट्रोल रूम, कोर्ट, वन स्टॉप सेंटर और कई सरकारी दफ्तरों का भी दौरा किया और वहां के कामकाज को करीब से देखा. कार्यक्रम के अंत में इन बेटियों ने संकल्प लिया कि वे पढ़-लिखकर अपने माता-पिता, नालंदा और देश का नाम रोशन करेंगी.
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