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सीहेंज का रहस्य: 4000 साल पहले कड़ाके की ठंड से बचने के लिए क्या सच में की गई थी ये अजीब रस्म?

Seahenge mystery: 1998 में ब्रिटेन के समुद्र तट पर मिला सीहेंज आखिर क्यों बनाया गया था? नई रिसर्च बताती है कि यह कोई सामान्य स्मारक नहीं, बल्कि भीषण ठंड को मात देने की एक प्राचीन कोशिश थी.

सीहेंज का रहस्य: 4000 साल पहले कड़ाके की ठंड से बचने के लिए क्या सच में की गई थी ये अजीब रस्म?
ब्रिटेन के समुद्र किनारे मिले 4000 साल पुराने रहस्यमयी लकड़ी के घेरे 'सीहेंज' से जुड़ा बड़ा खुलासा.

Seahenge Bronze Age circle: ब्रिटेन के नॉरफोक समुद्र तट पर सालों से दबे पड़े एक लकड़ी के ढांचे ने वैज्ञानिकों की नींद उड़ा रखी थी. इसे सीहेंज (Seahenge) कहा जाता है. रेत के अंदर से जैसे ही ये रहस्यमयी ढांचा बाहर आया, चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया. कोई इसे किसी का अंतिम संस्कार बताता, तो कोई इसे कोई अजीबोगरीब 'बलि' का स्थान, लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया है. University of Aberdeen के डॉ. डेविड नेंस की नई रिसर्च के अनुसार, 2049 ईसा पूर्व के आसपास जब पूरी दुनिया में जलवायु बदल रही थी और ब्रिटेन में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी, तब लोगों ने उम्मीद की एक किरण के तौर पर इसे खड़ा किया था.

प्राचीन काल की वो अजीब रस्म (Ancient rituals of the Bronze Age)

डॉ. नेंस का तर्क है कि इसे बनाने का मकसद किसी को डराना नहीं, बल्कि वापस गर्मी लाना था. उस समय के लोग प्रकृति से गहरे जुड़े थे. उनका मानना था कि सीहेंज का ढांचा एक लोककथा पर आधारित है, जहां कोयल (cuckoo) को पकड़कर रखा जाता था ताकि गर्मी न जा सके. ये सिर्फ पत्थर और लकड़ी का घेरा नहीं था. इसे वसंत ऋतु में तैयार किया गया था और इसकी बनावट समर सोलेस्टिस (ग्रीष्म संक्रांति) के सूरज से जुड़ी थी. उस दौर के लोगों को लगता था कि अगर वे सूरज और वसंत को खुश कर लेंगे, तो यह भीषण ठंड जल्दी खत्म हो जाएगी.

सीहेंज का रहस्य (climate ritual)

इस जगह के पास ही एक और ढांचा 'होलम 2' (Holme II) भी मिला है. जानकारों के मुताबिक, यहां के लोग सिर्फ प्रार्थना ही नहीं करते थे, बल्कि संकट के समय वे 'बलि' भी देते थे. यह सब कुछ एक खास खगोलीय घटना और शुक्र ग्रह की स्थिति के हिसाब से किया जाता था. यह रिसर्च हमें बताती है कि कैसे 4000 साल पहले भी इंसान मौसम की मार से परेशान होकर आस्था का रास्ता चुनता था. उस समय की ये रस्में केवल परंपरा नहीं थी, बल्कि अस्तित्व को बचाने की एक आखिरी कोशिश रही होंगी. सीहेंज महज एक पुरातात्विक अवशेष नहीं है, बल्कि यह इंसानी संघर्ष और उम्मीद की एक ऐसी कहानी है, जो हजारों साल बाद भी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि, मुश्किल समय में इंसान क्या कुछ नहीं करता.

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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