मुंबई के एक शख्स की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों खूब चर्चा में है. एक साधारण से हेयरकट के अनुभव ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐप-बेस्ड सेवाओं पर हम जिस अधिक रुपये का भुगतान करते हैं, वह सेवा के लिए होती है या सिर्फ सुविधा के लिए. यही सवाल अब इंटरनेट पर बहस का कारण बन गया है. पोस्ट पर हर कोई कमेंट कर अपनी राय रख रहा है.
350 रुपये का हेयरकट कराया बुक
दरअसल, अनिरुद्ध केजरीवाल ने एक्स (@AnirudhKejriwal) पर पोस्ट कर बताया कि मैं हाल ही में एक नए इलाके में शिफ्ट हुआ हूं. उन्होंने घर पर हेयरकट के लिए करीब 350 रुपये में एक ऐप के जरिए सर्विस बुक की थी. उन्हें एक सैलून दूर दिखा पड़ रहा था, इसलिए उन्होंने घर बैठे सेवा लेने का फैसला किया. हालांकि, सर्विस देने वाले व्यक्ति ने फोन करके बताया कि उसकी बाइक खराब हो गई है और वह कई घंटे देर से पहुंचेगा. ऐसे में अनिरुद्ध ने बुकिंग कैंसिल कर दी और घर से बाहर निकल आए. बाहर निकलने पर उन्हें अपनी बिल्डिंग के नीचे एक छोटा सा सैलून दिखा, जिस पर पहले कभी ध्यान नहीं गया था. उन्होंने वहीं हेयरकट कराया और सिर्फ 60 रुपये खर्च हुए. पूरा काम 20 मिनट से भी कम समय में हो गया.
The Cost of Convenience in India
— Anirudh Kejriwal (@AnirudhKejriwal) June 13, 2026
Booked an Urban Company haircut ~ ₹350.
Not my usual thing…don't love the idea of a makeshift salon setup in my living room, but I'd just moved to a new area and the nearest barbershop on Google Maps was 1.5km away. Didn't feel like making the…
क्या सुविधा ही है असली प्रोडक्ट
अनिरुद्ध ने आगे लिखा कि अतिरिक्त 300 रुपये असल में घर बैठे सुविधा पाने की कीमत थी. उनके मुताबिक, कई बार महंगी ऐप सर्विस और दुकानदार की गुणवत्ता में ज्यादा फर्क नहीं होता. फर्क सिर्फ इतना है कि ऐप आपको खोजने और वहां तक जाने की परेशानी से बचा देता है.
सोशल मीडिया पर बंटा ओपिनियन
पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने अलग-अलग ओपिनियन दिया. कुछ यूजर्स ने कहा कि समय बचाने और आराम के लिए अतिरिक्त पैसे देना पूरी तरह सही है. वहीं कई लोगों ने माना कि आज की डिजिटल दुनिया में लोग सेवा से ज्यादा सुविधा खरीद रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, "No one gives a ₹60 haircut nowadays unless he's sitting on a footpath with a makeshift chair and rusted scissors. ₹300 for a haircut at home is quite reasonable until you're used to this." वहीं दूसरे शख्स ने कहा, "घर बैठे सर्विस मिलना भी एक बड़ी सुविधा है, जिसकी अपनी कीमत होती है." इनके अलावा एक अन्य यूजर ने लिखा, "It really is cost of convenience, but something I don't mind paying. I remember days as a kid where you go to salon on Sunday and wait for an hour for your turn + queue jumps. The salon now comes to you! For once a month, I will take the deal"
(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)
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