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एक पहिए की साइकिल से 11000 KM का सफर... केरल से नेपाल के रास्ते में है शख्स, मकसद जान करेंगे सलाम

केरल से नेपाल के लिए निकले सनीद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. एक पहिए का साइकिल पर उनके बैलेंस बनाने के टैलेंट ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.

एक पहिए की साइकिल से 11000 KM का सफर... केरल से नेपाल के रास्ते में है शख्स, मकसद जान करेंगे सलाम
एक पहिए की साइकिल से केरल से नेपाल का सफर (Photo: Screengrab)
  • केरल के प्रोफेशनल बाइक स्टंटर सनीद बिना अगले पहिए वाली साइकिल से 11 हजार KM की यात्रा पर निकले हैं.
  • 'Say No to Drugs' का संदेश लेकर वे नेपाल के एवरेस्ट बेस कैंप तक सफर कर रहे हैं.
  • सनीद का मकसद लोगों को दिखाना है कि नशे के बिना भी कुछ अलग किया जा सकता है.
नई दिल्ली:

चेहरे पर आत्मविश्वास की चकम लिए एक शख्स फिल्म जैसा स्टंट करते हुए केरल से नेपाल के सफर पर निकला है. उसके हाथ में साइकिल की हैंडल है, जो आधी है. यानी ऐसी साइकिल, जिसमें सिर्फ पीछे वाला पहिया है. यह एक माडिफाइड साइकिल है, जिसका का अगला हिस्सा उठाए, सड़क पर बैलेंस बनाकर चलाते हुए ये शख्स सफर कर रहा है और नेपाल उसका डेस्टिनेशन है. ये केरल केरल के साइकिलिस्ट सनीद हैं, जिन्होंने साइकिल के जरिए ग्यारह हजार किलोमीटर की यात्रा करने की ठानकर निकले हैं.

सनीद आम सड़कों से गुजरते जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर उनका वीडियो वायरल है. लोग विजुअल्स देखकर हैरान भी हैं और परेशान भी हैं.

इस सफर का क्या मकसद है?

केरल के साइक्लिस्ट सनीद का यह सफर ड्रग्स के खिलाफ मुहिम का हिस्सा है. उनका मानना है कि नशीले पदार्थों का बहिष्कार होना चाहिए. वे ‘Say No to Drugs' का संदेसा लेकर निकल पड़े हैं और नेपाल के रास्ते में हैं. उन्होंने कश्मीर तक अपनी राइड पूरी कर ली है.

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए सनीद कहते हैं, "मैंने बिना अगले पहिये के केरल से कश्मीर तक की राइड पूरी की है. मैं केरल से एवरेस्ट बेस कैंप जा रहा हूं."

सनीद सिविल इंजीनियरिंग और इंटीरियर डिजाइनिंग की पढ़ाई कर चुके हैं और प्रोफेशनल बाइक स्टंटर भी हैं. वे बताते हैं कि हम इंडियन आर्मी को उनकी परेड के स्टंट्स के लिए ट्रेनिंग देते हैं. 

सनीद कहते हैं कि अब तक मैंने 7,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर ली है. मैं हर रोज औसतन 50 से 60 किलोमीटर की दूरी तय करता हूं, और एक दिन में सबसे ज्यादा 150 किलोमीटर तक चला हूं. यह पूरी तरह से सड़क की हालत और मौसम पर निर्भर करता है. इस इलाके में तेज हवाओं की वजह से बैलेंस बनाना बहुत मुश्किल होता है. 

'मैं लोगों को दिखाना चाहता हूं कि...'

सनीद कहते हैं, "आम साइकिलिंग के मुकाबले बिना अगले पहिये के राइडिंग करना बहुत मुश्किल है, लेकिन मुझे 12 साल का एक्सपीरिएंस है. मैं केरल, तमिलनाडु और पूरे भारत में ड्रग्स के इस्तेमाल के खिलाफ संदेश फैलाना चाहता हूं, जिससे लोगों को दिखा सकूं कि कुछ अलग करने के लिए ड्रग्स की जरूरत नहीं है."

उन्होंने आगे कहा कि वही करें, जिससे आपको खुशी मिले. अपनी जिदगी बर्बाद न करें. अगर मेरा सफर किसी एक शख्स को भी अपनी सोच बदलने के लिए मोटिवेट करता है, तो वही मेरा असली वर्ल्ड रिकॉर्ड होगा.

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