Private Schools: निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली से मध्यवर्गीय परिवार पहले से ही हलकान रहते हैं, लेकिन गर्मियों की महीने भर की छुट्टियों में भी जब स्कूल पूरी तरह बंद रहते है, तब भी स्कूल्स ट्रांसफोर्ट समेत अन्य फीस अभिभावकों से चार्ज करते हैं. अपने हकों को जानते हुए अभिभावक मूक-बधिर बन रहते हैं. स्कूल प्रबंधन कर्मचारियों की सैलरी देने के नाम पर छुट्टी में सामान्य फीस वसूलते हैं, जबकि इसके लिए स्पष्ट गाइडलाइन हैं. अभिभावक विरोध में जिला शिक्षा अधिकारी (DIOS) ऑफिस में शिकायत दर्ज करवा सकते हैं, लेकिन फिर भी फीस चुकाने को अभिसप्त हैं.
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महीने भर की गर्मियों की छुट्टी में भी चुकानी पड़ती है ट्रांसपोर्ट फीस
गौरतलब है परिवहन सेवा हमेशा एक वैकल्पिक (Optional) सेवा है. स्कूल किसी भी अभिभावक को जबरन बस सेवा लेने या पूरे साल की फीस एडवांस देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता. सालाना एक महीने की छुट्टियों के दौरान जब स्कूल पूरी तरह से बंद रहते हैं, तब भी ज्यादातर स्कूलों में अभिभावकों को बच्चों की ट्रांसपोर्ट समेत पूरी फीस चुकानी पड़ती है, जिसको लेकर कई बार आंदोलन हुए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.
कोराना काल में भी स्कूलों को पूरी फीस देने को लेकर विरोध हुआ
कोराना लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों ने ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान स्कूल को पूरी फीस देने का विरोध किया था. तब मामला हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था. सोशल मीडिया पर 'No School, No Fee' जैसे हैशटैग के जरिए विरोध जताया गया था, लेकिन स्कूलों ने तब तर्क दिया था कि एडमिशन के समय ही फीस स्ट्रक्चर में स्पष्ट होता है कि फीस पूरे शैक्षणिक वर्ष की ली जाएगी.
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सुप्रीम कोर्ट ने भी अतिरिक्त शुल्कों की उगाही पर लगाई है रोक
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक स्कूल्स छुट्टियों के दौरान भी ट्यूशन फीस (Tuition Fee) वसूल सकते हैं ताकि वे अपने स्टाफ को वेतन दे सकें, लेकिन कोर्ट ने स्कूलों पर अतिरिक्त शुल्कों की उगाही पर रोक लगाई है. अदालतें आमतौर पर इस पक्ष में रही हैं कि जो सुविधाएं (जैसे बिजली, पानी, लैबोरेटरी, स्पोर्ट्स, ट्रांसपोर्ट) छुट्टियों के दौरान इस्तेमाल नहीं हो रही हैं, उनके पैसे स्कूल नहीं वसूल सकते हैं.
ऐसी सुविधा का चार्ज स्कूल नहीं ले सकते जो छुट्टियों में नहीं दी
चूंकि शिक्षा समवर्ती सूची में है, इसलिए अलग-अलग राज्यों ने अपने 'Fee Regulation Act' हैं. उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र के नियमों के अनुसार, स्कूल को अपने खर्चों का पूरा ऑडिट सरकार को सौंपना होता है और अगर कोई स्कूल किसी ऐसी सुविधा का चार्ज लेता है जो उसने छुट्टियों में नहीं दी, तो अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी (DIOS) या राज्य की 'फीस रेगुलेटरी कमेटी' में इसकी शिकायत कर सकते हैं.
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बच्चों को स्कूल पहुंचाने वाले बस (प्रतीकात्मक)
Photo Credit: Canva Library
छुट्टियों के दौरान शिक्षकों के वेतन के लिए 'ट्यूशन फीस' लेना ही वैध है
गौरतलब है भारतीय उपभोक्ता संरक्षण कानूनों और राज्यों के स्कूल शिक्षा अधिनियमों के अनुसार कानूनी रूप से छुट्टियों के दौरान शिक्षकों के वेतन के लिए 'ट्यूशन फीस' लेना वैध है, लेकिन उस सालाना गर्मियों की एक महीने के दौरान परिचालन शुल्क (जैसे ट्रांसपोर्ट या मेंटेनेंस) वसूलना न्यायोचित नहीं माना जाता है, जिसके खिलाफ कानूनन शिकायत की जा सकती है.
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