Alka Yagnik Disease: बॉलीवुड प्लेबैक सिंगर अलका याज्ञनिक को राष्ट्रपति भवन में हाल ही में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू द्वारा प्रतिष्ठित 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया, लेकिन राष्ट्रपति भवन से आई अलका याज्ञनिक की तस्वीरों ने उनके प्रशसंकों को चौका दिया. हिंदी समेत विभिन्न भाषाओं में 20,000 से अधिक गानों को सुर दे चुकी अलका याज्ञनिक मंच तक पुरस्कार लेने के लिए व्हील चेयर का सहारा लेकर पहुंची थी. राष्ट्रपति भवन का यह नजारा देख प्रशंसकों की आंखें चौड़ी हो गई. सबके मन में बस एक ही सवाल गूंज रहा है कि आखिर उनकी ऐसी दशा कैसे हुई?
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'मैं सेहत से जुड़ी मुश्किलों से गुज़र रही हूं'
अपनी सेहत से जुड़ी चुनौतियों के बारे में प्रशंसकों से अलका याज्ञनिक ने इंस्टाग्राम पर एक नोट शेयर किया. उन्होंने लिखा, "मैं पिछले दो सालों से लाइमलाइट, पब्लिक अपीयरेंस और अपनी यात्रा के बारे में ज़्यादा कुछ शेयर करने से दूर रही हूं. उन्होंने आगे लिखा, "आप में से कई लोग जानते हैं कि मैं सेहत से जुड़ी मुश्किलों से गुज़र रही हूं, लेकिन इस दौरान आपके प्यार, दुआएं, मैसेज हर कदम पर मेरे साथ रहा."
Wishing Alka Yagnik strength, comfort, and a smooth recovery. May she regain her health soon and return to full mobility and good health. pic.twitter.com/22jkpDZtOP
— Sapna Madan (@sapnamadan) June 24, 2026
'इस बड़े झटके ने पूरी तरह से चौंका दिया'
अलका याज्ञनिक ने प्रशसंकों को बताया कि, वो वायरल अटैक के कारण होने वाली बीमारी रेयर 'सेंसरी-न्यूरल नर्व हियरिंग लॉस' से जूझ रही हैं, जिससे उन्हें सुनने में परेशानी हो रही है. उन्होंने बताया कि अचानक आए इस बड़े झटके ने उन्हें पूरी तरह से चौंका दिया. अब मैं इसे स्वीकार करने की कोशिश कर रही हूं. उन्होंने युवा फैन्स को तेज़ म्यूज़िक और हेडफ़ोन के इस्तेमाल के जोखिम के बारे में चेताया और सावधानी बरतने की सलाह दी.
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क्या होती है सेंसरी-न्यूरल हियरिंग लॉस (SNHL)?
सुनने की क्षमता हमेशा के लिए खोने के सबसे आम प्रकार को सेंसरी-न्यूरल हियरिंग लॉस (SNHL) कहा जाता है. यह इंसान को तब होता है जब कान के अंदरूनी हिस्से खासकर कॉक्लिया (cochlea) में मौजूद छोटी-छोटी हेयर सेल्स (कान से दिमाग तक आवाज़ के सिग्नल ले जाने वाली ऑडिटरी नर्व) को नुकसान पहुंचता है. एक बार जब हेयर सेल्स या नर्व्स डैमेज हो जाती हैं, तो आमतौर पर अपने आप ठीक नहीं हो पातीं है. यह पीड़ित के एक या दोनों कानों को नुकसान पहुंचा सकता है और यह धीरे-धीरे या अचानक डैमेज हो सकता है.
सेंसरी-न्यूरल हियरिंग लॉस के शुरुआती लक्षण
सुनने की क्षमता के कम होने से पीड़ित इंसान को किसी से बातचीत करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है. पीड़ित व्यक्ति में शुरूआती लक्षण के रूप में उसे अक्सर दूसरों से अपनी बात दोहराने के लिए कहने से समझा जा सकता है. ऐसे व्यक्ति को टीवी, रेडियो या फ़ोन की आवाज़ बढ़ाने की ज़रूरत पड़ती है और ऊंची पिच वाली आवाज़ें सुनने में परेशानी होने लगती है. पीड़ित को लगता है कि उसके आसपास के लोग बुदबुदा रहे हैं और कुछ लोगों के कानों में घंटी बजती हैं. हालांकि लंबे समय तक सुनने में परेशानी के लक्षणों की जल्द पहचान से इसमें सुधार की संभावना होती है.
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कितने प्रकार के होते हैं सेंसरी-न्यूरल हियरिंग लॉस?
इंसान में सेंसरी-न्यूरल हियरिंग लॉस की बीमारी जन्म के समय से भी हो सकता है, जिसके लिए आनुवंशिक वजहों अथवा गर्भावस्था के दौरान संक्रमण कारण हो सकता है. उम्र बढ़ने, संक्रमण, चोट या तेज़ शोर के संपर्क में आने के कारण भी यह बीमारी हो सकती है. यह बीमारी अचानक भी हो सकता है, जिससे पीड़ित की सुनने की क्षमता का तेज़ी से कम हो जाती है, जिसके लिए तुरंत मेडिकल मदद की ज़रूरत होती है. हालांकि इस बीमारी का सबसे कॉमन टाइप है उम्र. जब उम्र बढ़ने के साथ धीरे-धीरे सुनने की क्षमता कम होनी शुरू हो जाती है.
सेंसरी-न्यूरल हियरिंग लॉस के जोखिम के कारण
बढ़ती उम्र और लगातार हेडफ़ोन के ज़रिए तेज़ शोर के संपर्क में रहने वाले लोग सेंसरी-न्यूरल हियरिंग लॉस के जोखिम में जल्दी फंस सकते हैं. हालांकि आनुवांशिकी कारण से भी यह हो सकता है. यह बीमारी कान के संक्रमण या कुछ वायरल बीमारियां से भी होती हैं. सिर की चोट या ऐसी दुर्घटना जिसमें कान या दिमाग पर असर पड़ता है, इस कारण भी इसका जोखिम हो सकता है. इसके अलावा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित बीमारी की कुछ दवाइयों का सेवन भी सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है. इनमें कुछ एंटीबायोटिक्स और कीमोथेरेपी की दवाएं शामिल हैं.
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सेंसरी-न्यूरल हियरिंग लॉस का इलाज और बचाव
सेंसरी-न्यूरल हियरिंग लॉस आमतौर पर स्थायी होता है, लेकिन लक्षण की जल्द पहचान के बाद इलाज से इसमें सुधार लाया जा सकता है. इससे पीड़ित मरीजों को आमतौर पर सुनने और समझने के लिए हियरिंग एड का इस्तेमाल करने के लिए दिया जाता हैं और जिन लोगों को सुनने की बहुत ज़्यादा समस्या होती है, उन्हें कॉक्लियर इम्प्लांट की सलाह दी जा सकती है, जो कान के अंदरूनी हिस्से के क्षतिग्रस्त हिस्सों को बायपास करते हैं और सीधे सुनने वाली नस (ऑडिटरी नर्व) को स्टिमुलेट करते हैं.
अचानक सुनने की क्षमता खोना लक्षण है, बीमारी नहीं
आईबीएस हॉस्पिटल दिल्ली के न्यूरो डिपार्टमेंट में कंसल्टेंट डा. राहुल चावला बताते हैं कि अचानक सुनने की क्षमता खोना एक लक्षण है, न कि कोई बीमारी. उन्होंने कहा कि हियरिंग लॉस के असली कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत क्लिनिकल जांच की ज़रूरत होती है. उन्होंने आगे कहा कि, न्यूरोलॉजिकल नज़रिए से देखें तो सुनने की क्षमता कम होने की समस्या वाले मरीज में बीमारी के कुछ गंभीर लक्षण भी प्रकट होते हैं. इनमें शरीर का संतुलन बिगड़ना, लगातार चक्कर आना, चेहरे पर कमज़ोरी या सुन्नपन, दो-दो चीज़ें दिखाई देना, बोलने में दिक्कत, हाथ-पैरों में कमज़ोरी प्रमुख हैं.
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डाक्टर ने अलका याग्निक की बीमारी को लेकर क्या कहा?
पूर्व में दिल्ली एम्स में सेवा दे चुके डा. चावला ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से व्हील चेयर पर बैठकर पद्म भूषण अवॉर्ड लेने पहुंची प्लेबैक सिंगर अलका याग्निक के ऐसा करने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं, उसके बारे में अभी कुछ भी कहना मुश्किल है, क्योंकि उनकी बीमारी से जुड़ी कोई भी सटीक जानकारी अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.
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