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आखिर कोरिया में कचरे की थैलियां जमा करने के लिए क्यों मच रही है मारामारी, चौंका देगी वजह

अब तक तो आपने राशन और तेल के लिए लंबी कतारें देखी होंगी, लेकिन क्या कभी कूड़े के प्लास्टिक बैग के लिए 'कत्लेआम' मचते देखा है? सियोल की सड़कों पर इन दिनों अजब तमाशा चल रहा है, जहां लोग तिजोरी भरने के बजाय कचरे के थैले जमा करने के लिए ऐसे टूट पड़े हैं जैसे उसमें सोना निकलने वाला हो.

आखिर कोरिया में कचरे की थैलियां जमा करने के लिए क्यों मच रही है मारामारी, चौंका देगी वजह
Gold की तरह कचरे की थैलियां क्यों जमा कर रहे हैं कोरिया के लोग!, चौंका देगी वजह

Why South Koreans are Panic Buying Trash Bags: दुनियाभर में अजब-गजब किस्सों की कमी नहीं है. अब दक्षिण कोरिया को ही देख लीजिए, वहां लोग राशन और दूध के लिए नहीं, बल्कि कूड़े वाले प्लास्टिक बैग के लिए दुकानों पर टूट पड़े हैं. आलम ये है कि लोग एक-दूसरे का कचरा जमीन पर फेंककर बैग चुरा रहे हैं. आखिर ऐसा क्या हुआ कि अचानक सियोल की जनता के लिए 'कूड़े का थैला' सोने से भी महंगा हो गया? आइए जानते हैं इस अतरंगी भगदड़ की असली वजह

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Photo Credit: mo.of.everything

दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल की सड़कों पर इन दिनों एक अजीब सा 'तनाव' फैला हुआ है. लोग पागलों की तरह दुकानों पर दौड़ रहे हैं और देखते ही देखते करीब 27 लाख 'पे-एज-यू-थ्रो' कचरा बैग बिक गए. ये आंकड़ा सामान्य दिनों से पांच गुना ज्यादा है. दरअसल, वहां सरकारी नियम के मुताबिक कूड़ा फेंकने के लिए खास बैग खरीदना जरूरी है, लेकिन जैसे ही खबर फैली कि मिडिल ईस्ट में जंग की वजह से तेल की सप्लाई रुक सकती है, लोगों के हाथ-पांव फूल गए क्योंकि ये बैग पेट्रोलियम उत्पाद यानी 'नाफ्था' से ही बनते हैं.

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कचरा जमीन पर और बैग हाथ में...ये कैसी छीना-झपटी? (Seoul trash bag panic buying)

हैरानी की बात तो ये है कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला चुपके से किसी और का भरा हुआ कचरा बैग उठाती है, उसका सारा गंद जमीन पर पलटती है और खाली बैग लेकर रफूचक्कर हो जाती है. ये किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगता, लेकिन सियोल के यांगचोन-गु इलाके में ये हकीकत है. लोग इस कदर डर गए हैं कि उन्हें लग रहा है कल को कचरा फेंकने के लिए बैग ही नहीं मिलेंगे. इसी डर ने वहां के कोस्पी इंडेक्स (शेयर बाजार) को भी 12 फीसदी नीचे गिरा दिया और करेंसी 'वॉन' भी 17 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई.

सरकार ने खोला खजाना और दिया तगड़ा भरोसा (Government Strategy and the Multi-Trillion Won Budget)

बिगड़ते हालात और महंगाई के खतरे को देखते हुए सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है. करीब 26.2 ट्रिलियन वॉन का मोटा बजट पास करने की तैयारी है, ताकि सप्लाई चेन को पटरी पर लाया जा सके. पर्यावरण मंत्री ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर किल्लत हुई, तो लोग सादे प्लास्टिक बैग भी इस्तेमाल कर सकेंगे. फिलहाल, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि असली पंगा सप्लाई का है, क्योंकि तेल का संकट सीधा प्लास्टिक और कंस्ट्रक्शन जैसे बड़े उद्योगों की कमर तोड़ रहा है.

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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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