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समंदर पार साड़ी का 'भौकाल': अमेरिका के म्यूजियम में क्यों सजी भारत की ये साड़ी? जानें

सात समंदर पार अमेरिका के स्पेस म्यूजियम में भारत की एक साड़ी ने तहलका मचा दिया है. आखिर इस लिबास में ऐसा क्या 'जादू' है कि विदेशी भी इसके मुरीद हो गए? इसके पीछे इसरो की उन 'रॉकेट वुमन' की दास्तान है, जिन्होंने मंगल तक अपनी धमक दिखाई.

समंदर पार साड़ी का 'भौकाल': अमेरिका के म्यूजियम में क्यों सजी भारत की ये साड़ी? जानें
साड़ी पहनकर फतह किया मंगल! अब अमेरिका के स्पेस म्यूजियम में दिखेगा 'रॉकेट वुमन' का जलवा
smithsonian

Mars Orbiter Mission Saree: भारत की एक साड़ी ने इन दिनों अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में खलबली मचा दी है. बात कोई फैशन शो की नहीं है, बल्कि उस लिबास की है जिसे पहनकर एक भारतीय महिला ने मंगल ग्रह फतह करने की रणनीति तैयार की थी. इसरो की 'रॉकेट वुमन' नंदिनी हरिनाथ की वो खास साड़ी अब दुनिया के सबसे बड़े स्पेस म्यूजियम की शोभा बढ़ा रही है. आइए जानते हैं क्या है इस साड़ी और इसके पीछे छिपी कामयाबी की अनसुनी दास्तान.

जब मंगलयान की कामयाबी अमेरिका पहुंची (Nandini Harinath ISRO)

अमेरिका के मशहूर 'स्मिथसोनियन नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम' ने अपनी नई प्रदर्शनी में एक भारतीय परिधान को जगह दी है. यह कोई मामूली कपड़ा नहीं, बल्कि इसरो वैज्ञानिक नंदिनी हरिनाथ की वो साड़ी है, जिसे उन्होंने भारत के ऐतिहासिक मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM) के दौरान पहना था. हरिनाथ इस मिशन की डेप्युटी ऑपरेशन डायरेक्टर थीं और उन्होंने मंगलयान की प्लानिंग और ऑपरेशन में लोहा मनवाया था.

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रॉकेट वुमन का ऐतिहासिक लिबास (Rocket Woman's Historic Attire)

म्यूजियम ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर इस साड़ी की झलक दिखाई है, जिसमें लाल और नीले रंग की बारीक डिजाइन वाली साड़ी एक डमी पर लिपटी नजर आ रही है. इसके साथ ही एक नीले रंग का ब्लाउज भी प्रदर्शित किया गया है. यह साड़ी अब अंतरिक्ष की दुनिया में भारत की धाक और महिला शक्ति की राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक बन चुकी है. गौरतलब है कि इस मिशन की सफलता ने भारत को मंगल तक पहुंचने वाला पहला एशियाई देश बना दिया था.

कौन हैं नंदिनी हरिनाथ? (Indian Identity in Space Exploration)

नंदिनी का बचपन एक ऐसे माहौल में बीता जहां पढ़ाई को इबादत समझा जाता था. उनकी मां गणित की टीचर और पिता इंजीनियर थे. उन्होंने खुद इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की और इसरो में अपने करियर के दौरान 14 से अधिक महत्वपूर्ण मिशनों में अपना योगदान दिया है. मंगलयान मिशन (जो महज कुछ महीनों के लिए डिजाइन था) उन्होंने 8 सालों तक मंगल की कक्षा में रहकर डेटा भेजा, जो नंदिनी और उनकी टीम की काबिलियत का सबूत है.

काबिलियत का लोहा मानती दुनिया (World Acknowledging the Talent)

यह खबर हमें गर्व से भर देने वाली है, क्योंकि यह दिखाती है कि भारतीय संस्कार और विज्ञान जब मिलते हैं, तो इतिहास रचा जाता है. अमेरिका के म्यूजियम में सजी यह साड़ी सिर्फ एक पहनावा नहीं, बल्कि हर उस भारतीय महिला के सपनों की उड़ान है, जो सितारों को छूने का जज्बा रखती है.

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