US Jobs For Indians: अमेरिका में H1B वीजा पर काम कर रहे भारतीयों के लिए छंटनी (Layoffs) किसी बुरे सपने से कम नहीं है. ऐसा ही एक दर्दनाक वाकया सामने आया है, जहां एक भारतीय एआई इंजीनियर (AI Engineer) ने अपना दर्द बयां किया है. अमेरिका की एक फॉर्च्यून 500 कंपनी में 3 साल काम करने के बाद इस टेक वर्कर को अचानक नौकरी से निकाल दिया गया. लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि छंटनी के बाद उसका काम और पूरा प्रोजेक्ट ही 'इंडिया टीम' को सौंप दिया गया.
60 दिन में नहीं मिली नौकरी, अब घर वापसी की तैयारी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) के r/developersIndia फोरम पर noobcoder17 नाम के एक यूजर ने अपनी कहानी शेयर की है. 30 साल की उम्र पार कर चुके इस अविवाहित इंजीनियर के पास भारत में साढ़े तीन साल और अमेरिका में तीन साल काम करने का शानदार अनुभव है. इसके अलावा उन्होंने अपना सारा स्टूडेंट लोन भी चुका दिया है. छंटनी के बाद उन्हें अमेरिका में 60 दिन के ग्रेस पीरियड में दूसरी नौकरी नहीं मिल पाई. अब उनके पास या तो अमेरिका में ही रुकने के लिए पीएचडी (PhD) या दूसरी मास्टर्स डिग्री करने का विकल्प है, या फिर इस वीजा की जद्दोजहद को छोड़कर हमेशा के लिए भारत लौटने का रास्ता बचा है.
Returning from USA to India due to layoff while being on a H1b. Ironically my Job and entire project got moved to India team.
by u/noobcoder17 in developersIndia
भारत की नौकरी से ज्यादा फायदेमंद था अमेरिका का 'सेवरेंस पैकेज'
रेडिट पोस्ट पर जब एक यूजर ने सलाह दी कि उन्हें उसी कंपनी की इंडिया टीम में 40 लाख रुपये से ज्यादा के पैकेज पर नौकरी मांग लेनी चाहिए थी, तो इंजीनियर ने चौंकाने वाला जवाब दिया. उसने बताया कि उसे भारत में रोल या सेवरेंस पैकेज (हर्जाना) में से एक चुनना था. उसने डॉलर में मिल रहा सेवरेंस पैकेज चुना क्योंकि अमेरिका का 12 हफ्ते का सेवरेंस पे, भारत में 9 महीने काम करने के बराबर था.
'US का तजुर्बा टैलेंट नहीं, सिर्फ किस्मत है'
पोस्ट पर एक अन्य यूजर ने उनका हौसला बढ़ाते हुए लिखा कि उनका प्रोफाइल बहुत मजबूत है और भारत में एआई इंजीनियरिंग और फॉर्च्यून 500 के अनुभव की भारी डिमांड होगी. इसके जवाब में इंजीनियर ने बड़ी ही सादगी से कहा कि वह ऐसा नहीं मानते कि अमेरिका का अनुभव होने से वह ज्यादा टैलेंटेड हो गए हैं. उनके मुताबिक, यह सिर्फ सही समय पर सही जगह होने और किस्मत का खेल है. हालांकि, उन्हें इस बात का डर है कि वह भारतीय रिक्रूटर्स को यह बात कैसे समझाएंगे.
'भारतीय रिक्रूटर्स बदतमीज हैं'
इस इंजीनियर की सबसे बड़ी चिंता भारतीय जॉब मार्केट को लेकर है. इसी पोस्ट पर एक यूजर ने अपने एक दोस्त का डरावना अनुभव शेयर किया, जो 5 साल अमेरिका में काम करने के बाद भारत लौटा था. उस यूजर ने बताया कि भारत लौटने पर उसके दोस्त को नई नौकरी खोजने में 5 महीने से ज्यादा का वक्त लग गया और भारी 'पे-कट' झेलना पड़ा. इतना ही नहीं, भारतीय रिक्रूटर्स का रवैया रिटर्न पेशेवरों के साथ बेहद खराब होता है. वे बजट तक नहीं बताते और अजीब तरह से बात करते हैं. यह सुनकर अमेरिकी इंजीनियर ने हैरानी जताते हुए कहा कि एचआर का तो काम ही कंपनी के कल्चर को अच्छे से पेश करना और विनम्र होना है, फिर वे इतने रूखे कैसे हो सकते हैं!
(Disclaimer: यह कहानी रेडिट पर वायरल हुई एक पोस्ट और उसके बाद मिली सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं पर आधारित है. एनडीटीवी ने पोस्ट में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.)
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