गुरुग्राम में रहने वाले शिवा मित्तल (Shiva mittal) ने अपनी मेड के फाइनेंशियल मैनेजमेंट की स्टोरी शेयर की है. उन्होंने अपनी पोस्ट में बताया कि उनकी हाउस हेल्प हर दिन 5 से 6 घरों में काम करती है और महीने में करीब 60,000 रुपये कमा लेती है. वो 10 हजार रुपये किराया देती हैं, अपनी बेटी को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती हैं और गांव में 6 लाख रुपये की जमीन के लिए हर महीने ईएमआई भी भरती है.

कॉरपोरेट लाइफ और शोऑफ पर तंज
शिवा के मुताबिक, 'हम लोग महंगी गाड़ियों, महंगे फोन और लाइफस्टाइल के लिए ईएमआई लेते हैं, जिनकी कीमत समय के साथ घटती है, लेकिन उनकी मेड सिर्फ उन चीजों में पैसे लगाती है, जिनकी कीमत फ्यूचर में बढ़ेगी. बिना किसी इंश्योरेंस या कॉरपोरेट सुरक्षा के, वो रोज सुबह 7 बजे से पहले काम पर निकल जाती है और अपने फ्यूचर के गोल्स को पूरा कर रही हैं.
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इंटरनेट पर छिड़ गई नई बहस
सोशल मीडिया पर शिवा की ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिस पर लोगों के अलग अलग रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं. कुछ यूजर्स ने मेड के इस जज्बे और डिसिप्लिन की तारीफ की, तो कुछ का कहना था कि, 'बिना किसी मेडिकल इमरजेंसी कवर के ये बचत कभी भी खत्म हो सकती है. वहीं कुछ लोगों ने कमेंट सेक्शन में लिखा कि, 'कॉरपोरेट नौकरी और मेहनत मजदूरी की तुलना करना सही नहीं है.'
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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
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