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एक साल का काम, एक घंटे में! गूगल इंजीनियर के दावे ने AI को लेकर बढ़ा दी टेंशन

जिस काम में दिमाग, टीम और सालभर की मेहनत लगती हो...अगर वही काम AI सिर्फ एक घंटे में कर दे, तो सवाल उठना लाजमी है गूगल की एक सीनियर इंजीनियर के अनुभव ने AI VS इंसान की बहस को एक बार फिर आग दे दी है.

एक साल का काम, एक घंटे में! गूगल इंजीनियर के दावे ने AI को लेकर बढ़ा दी टेंशन
AI ने मिनटों में कर दिया, जिस काम में टीम को लगा एक साल

Google engineer AI claim : AI से नौकरियां जाने की आशंका अब सिर्फ अंदेशा नहीं रही. तेजी, सटीकता और बिना थके काम करने की क्षमता ने AI को कई मामलों में इंसानों से आगे ला खड़ा किया है. इसी बीच Elon Musk का बयान भी चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने कहा कि आने वाले वक्त में AI लगभग हर क्षेत्र में इंसानों से बेहतर हो सकता है.

गूगल इंजीनियर का दावा, जिसने सबको चौंकाया (Google Engineer's Claim Shocks Tech World)

अब इस बहस में नया मोड़ लाई हैं गूगल की प्रिंसिपल इंजीनियर जाना डोगन (Jaana Dogan) ने. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि कोडिंग से जुड़ी एक जटिल समस्या, जिसे उनकी टीम पिछले एक साल से सुलझा रही थी, AI टूल Claude Code ने महज एक घंटे में हल कर दिया.

क्या थी वो टेक्निकल चुनौती (What Was the Technical Challenge?)

यह समस्या 'Distributed Agent Orchestrators' से जुड़ी थी, यानि ऐसे सिस्टम जो कई AI एजेंट्स को एक साथ काम करने के लिए मैनेज करते हैं. डोगन के मुताबिक, गूगल में इस पर कई डिजाइन विकल्पों पर काम हुआ, लेकिन किसी एक फाइनल मॉडल पर सहमति नहीं बन पाई थी. उन्होंने साफ किया कि AI को दी गई जानकारी सिर्फ तीन छोटे पैराग्राफ की थी और उसमें गूगल की कोई इंटरनल जानकारी शामिल नहीं थी. नतीजा परफेक्ट नहीं था, लेकिन इतना सटीक कि किसी भी अनुभवी इंजीनियर को हैरान कर दे.

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खतरा या मौका? डोगन का अलग नजरिया (artificial intelligence vs humans)

डोगन मानती हैं कि AI कोई जीरो-सम गेम नहीं है उन्होंने AI पर शक करने वालों से कहा कि वे उसे उसी फील्ड में आजमाएं, जिसमें उन्हें खुद गहरी समझ हो उनका कहना है कि AI की तरक्की डराने वाली नहीं, बल्कि प्रेरक है. यह मामला दिखाता है कि AI अब सिर्फ सहायक नहीं, बल्कि problem-solving partner बन चुका है. यह टेक इंडस्ट्री, नौकरियों और भविष्य के कामकाज को तेजी से बदलने वाला संकेत है. AI इंसानों की जगह लेगा या उनके साथ चलेगा...यह बहस जारी रहेगी लेकिन इतना तय है कि अब तकनीक की रफ्तार को नजरअंदाज करना मुमकिन नहीं.

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