Candida Auris Alert : Candida auris (C. auris) एक ड्रग-रेजिस्टेंट फंगस है, जिसे पहली बार 2009 में जापान में पहचाना गया था. अब हालात ये हैं कि यह फंगस 60 से ज्यादा देशों में फैल चुका है. अमेरिका के 27 राज्यों में करीब 7,000 मामले सामने आ चुके हैं. CDC ने इसे 'Urgent Antimicrobial Threat' कहा है, यानी ऐसा खतरा जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है. यह पहला फंगल पैथोजन है, जिसे यह दर्जा मिला है.
अस्पताल बने मैदान-ए-जंग (deadly fungus hospitals)
C. auris की सबसे खौफनाक बात यह है कि यह इंसानी त्वचा और अस्पताल की सतहों पर लंबे वक्त तक जिंदा रह सकता है. वेंटिलेटर पर मौजूद मरीज, ICU में भर्ती लोग और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीज इसके आसान शिकार बनते हैं. कई आम एंटीफंगल दवाएं इस पर असर नहीं करतीं, जिससे इलाज और भी पेचीदा हो जाता है.
वैज्ञानिकों की चिंता और नई उम्मीद (drug resistant fungus news)
Hackensack Meridian Center for Discovery and Innovation के वैज्ञानिकों की समीक्षा रिपोर्ट बताती है कि अब नई पीढ़ी की एंटीफंगल दवाओं, बेहतर डायग्नोस्टिक टेस्ट और यहां तक कि वैक्सीन-आधारित इलाज की जरूरत है. दिसंबर में आई एक रिसर्च में यह भी सामने आया कि C. auris आयरन चुराने के लिए खास जीन सक्रिय करता है. अगर इस प्रक्रिया को रोका जाए, तो इलाज की नई राह खुल सकती है.
दवाओं को मात देता सुपरबग (Candida Auris causes)
ये सिर्फ अमेरिका की कहानी नहीं है. कमजोर हेल्थ सिस्टम वाले देशों में यह फंगस और ज्यादा तबाही मचा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर सर्विलांस और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है. Candida auris कोई फिल्मी विलेन नहीं, बल्कि हकीकत का वो साया है जो अस्पतालों में दबे पांव घूम रहा है. वक्त रहते सतर्कता, रिसर्च और सही कदम ही इसे काबू में ला सकते हैं...वरना यह खामोश कातिल और भी जानें ले सकता है
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