मुम्बई:
महाराष्ट्र में आने वाले दिनों में गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश की विशालकाय मूर्तियां अब देखने को नहीं मिलेंगी। पहले जहां ये मूर्तियां 25 फीट से भी ऊंची होती थीं, वहीं अब इनकी ऊंचाई अधिक से अधिक 15 फीट और तीन फीट के आधार के साथ 18 फुट हो सकती है।
गणेशोत्सव के आयोजन का प्रबंध करने वाली बृहन्नमुम्बई सार्वजनिक गणेशोत्सक समन्वय समिति (बीएसजीएसएस) ने यह फैसला लिया है। 11 दिनों तक चलने वाला गणेशोत्सव 11 सितम्बर से शुरू हो रहा है।
समिति के अध्यक्ष नरेश दहीभावकर ने कहा, "पर्यावरणीय समस्याओं और ट्रैफिक के शोरगुल सहित कई अन्य कारणों से हमने स्वेच्छा से यह निर्णय लिया कि भगवान गणेश की मूर्तियों की ऊंचाई अधिकतम 15 फीट होगी। इसकी तीन फीट के आधार को जोड़कर देखा जाएग यह अधिकतम 18 फीट की होगी।" उन्होंने कहा कि मूर्ति की ऊंचाई सीमित करने का यह निर्णय गणेशोत्सव समिति के प्रतिनिधियों, सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों, कलाकारों तथा मूर्तिकारों की सर्वसहमति से लिया गया है।
बीएसजीएसएस पिछले 10 साल से गणेशोत्सव का आयोजन करने वाले करीब 10,500 संघों से मूर्ति का आकार छोटा करने की अपील कर रही थी, क्योंकि विशालकाय प्रतिमाओं के कारण दुर्घटनाएं हो रही थीं और श्रद्धालुओं की मौत हो रही थी। अंतत: उन्हें इसमें कामयाबी मिल गई।
दहीभावकर ने कहा कि मूर्तियों का आकार छोटा करने से इसकी लागत भी कम आएगी और खरीदारों को इसके लिए कम भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा, "18 फीट की मूर्ति औसतन 75,000 रुपये में आएगी, जबकि अधिक बड़ी आकार की मूर्ति पर लागत दोगुनी हो जाती है।"
उत्सव का आयोजन करने वाले संघों ने मूर्ति की ऊंचाई सीमित करने के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे मूर्ति की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा कर्मियों को भी राहत मिलेगी।
गणेशोत्सव के आयोजन का प्रबंध करने वाली बृहन्नमुम्बई सार्वजनिक गणेशोत्सक समन्वय समिति (बीएसजीएसएस) ने यह फैसला लिया है। 11 दिनों तक चलने वाला गणेशोत्सव 11 सितम्बर से शुरू हो रहा है।
समिति के अध्यक्ष नरेश दहीभावकर ने कहा, "पर्यावरणीय समस्याओं और ट्रैफिक के शोरगुल सहित कई अन्य कारणों से हमने स्वेच्छा से यह निर्णय लिया कि भगवान गणेश की मूर्तियों की ऊंचाई अधिकतम 15 फीट होगी। इसकी तीन फीट के आधार को जोड़कर देखा जाएग यह अधिकतम 18 फीट की होगी।" उन्होंने कहा कि मूर्ति की ऊंचाई सीमित करने का यह निर्णय गणेशोत्सव समिति के प्रतिनिधियों, सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों, कलाकारों तथा मूर्तिकारों की सर्वसहमति से लिया गया है।
बीएसजीएसएस पिछले 10 साल से गणेशोत्सव का आयोजन करने वाले करीब 10,500 संघों से मूर्ति का आकार छोटा करने की अपील कर रही थी, क्योंकि विशालकाय प्रतिमाओं के कारण दुर्घटनाएं हो रही थीं और श्रद्धालुओं की मौत हो रही थी। अंतत: उन्हें इसमें कामयाबी मिल गई।
दहीभावकर ने कहा कि मूर्तियों का आकार छोटा करने से इसकी लागत भी कम आएगी और खरीदारों को इसके लिए कम भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा, "18 फीट की मूर्ति औसतन 75,000 रुपये में आएगी, जबकि अधिक बड़ी आकार की मूर्ति पर लागत दोगुनी हो जाती है।"
उत्सव का आयोजन करने वाले संघों ने मूर्ति की ऊंचाई सीमित करने के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे मूर्ति की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा कर्मियों को भी राहत मिलेगी।
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